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UGC विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया, कहा- ‘मैं भरोसा दिलाता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा’

Written by:Shyam Dwivedi
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देश में बवाल मचा हुआ है। सवर्ण समाज द्वारा इन नियमों को UGC का काला कानून बताकर विरोध किया जा रहा है। इस बीच, भारत के शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का बयान सामने आया है। उन्होंनें कहा कि मैं सभी को भरोसा दिलाता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा।
UGC विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया, कहा- ‘मैं भरोसा दिलाता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा’

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देश में बवाल मचा हुआ है। UGC ने 13 जनवरी 2026 को नए नियमों को लागू किया है जिसको लेकर सवर्ण समाज में नाराजगी देखी जा रही है। तो वहीं सोशल मीडिया में #RollbackUGC ट्रेंड कर रहा है। इन नियमों को UGC का काला कानून बताकर विरोध किया जा रहा है। विरोध करने वालों का कहना है कि इस नए नियम के तहत सामान्य वर्ग के छात्रों को संभावित अपराधी करार दे दिया गया है। प्रदर्शन कर रहे लोग सरकार से मांग कर रहे है कि इन नियमों को वापस लिया जाए।

UGC नए नियमों पर बोले धर्मेंद्र प्रधान

एक तरफ जहां देश के कई राज्यों में UGC नए नियमों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। तो वहीं अब दूसरी ओर भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान भी सामने आ गया है। उन्होंने मीडिया को जवाब देते हुए कहा कि मैं सभी को भरोसा दिलाता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। उन्होंंने कहा कि यह जो व्यवस्था लागू की गई है वह सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की गई है।

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया पद से इस्तीफा

यूजीसी के नए नियमों को लेकर बवाल इतना बढ़ गया है कि बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, सवर्ण जाति संगठनों ने आंदोलन तेज करने की धमकी दे डाली है। बीजेपी में भी इसे नए नियम को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। कई नेताओं ने इन नए नियमों के खिलाफ नाराजगी जताई है।

क्या हैं UGC के नए नियम

UGC ने 2026 में नए नियम बनाए हैं। इसका नाम Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 रखा गया है। ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं। नियमों के मुताबिक, हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी। कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना जरूरी है।

क्यों हो रहा है विरोध?

UGC के द्वारा लागू किए गए नए नियमों का विरोध सवर्ण समाज द्वारा किया जा रहा है। उनका आरोप है कि ये नियम सवर्णों के खिलाफ हैं। नियमों में सिर्फ SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव की बात है। सामान्य वर्ग के छात्रों को भेदभाव का शिकार माना ही नहीं गया है जिसको लेकर विरोध हो रहा है। सवर्ण समाज के लोगों का कहना है कि इन नियमों का फायदा उठाकर कोई भी छात्र सवर्णों को फंसाने के लिए झूठी शिकायत कर सकता है।

UGC के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

UGC के नए नियमों के खिलाफ देश ​में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया कि UGC के नए नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं। वकील विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

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