Election 2023 : चुनावों से पहले घोषणाओं और योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र, MP और राजस्थान सरकार सहित चुनाव आयोग को नोटिस

Election 2023 : चुनावों से पहले घोषणाओं और योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र, MP और राजस्थान सरकार सहित चुनाव आयोग को नोटिस

Election 2023 : पांच राज्यों में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं, यहाँ की सरकारें जनता के लिए लोक लुभावन वादे कर रही हैं, घोषणाएं कर रही हैं, नई नई योजनायें लॉन्च कर रही हैं, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकारों ने इन दिनों घोषणाओं की झड़ी लगा रखी है, लेकिन अब इसपर उन्हें जवाब देना होगा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, मप्र सरकार, राजस्थान सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 4 सप्ताह में मांगा जवाब 

विधानसभा चुनावों से पहले सरकारों की लोकलुभावन योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सख्ती दिखाई है। मतदाताओं को लालच देने वाली इस योजनाओं के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, राजस्थान सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस भेजा है और एक महीने में इसका जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता ने दी ये दलील 

याचिकाकर्ता की दलील है कि सरकारें पांच साल काम नहीं करती और फिर चुनाव से ठीक पहले इन लोकलुभावन योजनाओं के जरिए वोटर्स को लालच देती हैं। सरकारें जनता के टैक्स का पैसा लुटाकर जनता से वोट बटोरने की कोशिश में रहती हैं जो अनुचित है। गौरतलब है जिन पांच राज्यों में चुनाव होने हैं वहां की मौजूदा सरकारों की कोशिश है कि आदर्श आचार संहिता लगने से पहले बड़ी घोषणाएं कर दी जाएं।

याचिकाकर्ता ने घोषणा पत्र पर भी नजर रखने की अपील की  

खासकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में रोज नई नई घोषणाएं हो रही है छत्तीसगढ़ में भी नए नए वादे किये जा रहे हैं, इनके खिलाफ सु्प्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई और इस सब पर रोक लगाने की मांग की गई। याचिका में ये भी  मांग की गई है कि राजनीतिक दलों के घोषणा-पत्रों पर भी नजर रखी जाना चाहिए। नेताओं से पूछा जाना चाहिए कि घोषणा-पत्र में किए गए बड़े-बड़े दावों को कैसे पूरा किया जाएगा।

नई याचिका की सुनवाई पहले से चल रही याचिकाओं के साथ होगी  

जनहित याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अदालत में हुई , अदालत ने केंद्र सर्कार, राजस्थान सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और चुनाव योग को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने नई जनहित याचिका को पहले से चल रही अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। सभी मामलों की सुनवाई अब एक साथ होगी।

जनवरी 2022 में भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने लगाई है याचिका  

गौरतलब है कि भाजपा नेता एवं सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने फ्रीबीज के खिलाफ जनवरी 2022 में एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी। याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियों के वोटर्स से फ्रीबीज या मुफ्त उपहार के वादों पर रोक लगाने की अपील की है। याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग को ऐसी पार्टियां की मान्यता रद्द करनी चाहिए। इस याचिका पर सुनवाई जारी है अब नई याचिका भी इसी के साथ क्लब कर सुनी जाएगी।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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