निर्वाचन आयोग की अपीलीय प्राधिकरण ने मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज को 45 दिनों तक रखने की अवधि कम करने के कारणों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, उसने केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) को निर्देश दिया है कि भारत टुडे की आरटीआई याचिका में मांगी गई जानकारी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दी जाए। पहले सीपीआईओ ने यह कहकर जानकारी देने से मना किया था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
इलेक्ट्रॉनिक डेटा से जुड़ी कहानियां
निर्वाचन आयोग ने जुलाई 2025 में आदेश दिया था कि मतदान प्रक्रिया से संबंधित फुटेज को चुनाव परिणामों के 45 दिनों बाद नष्ट कर दिया जाए, ताकि इसके इलेक्ट्रॉनिक डेटा से जुड़ी गलत कहानियों को रोका जा सके। अगर कोई चुनाव याचिका दायर होती है, तो फुटेज को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक रखा जाता है और अदालत के आदेश पर पेश किया जा सकता है।
क्या रखी गई है मांग
भारत टुडे ने आरटीआई के जरिए तीन मुख्य जानकारियां मांगी थीं: अवधि कम करने के फैसले की स्टडी या रिपोर्ट, फुटेज रखने के दिशानिर्देशों में बदलाव से जुड़ी फाइल और पत्राचार, और फुटेज के दुरुपयोग से संबंधित मूल्यांकन का विवरण। लेकिन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया। इस फैसले की विपक्ष ने आलोचना की, और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे संदिग्ध बताया।





