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EPFO: कर्मचारियों के लिए् अच्छी खबर! बढ़ सकती है सैलरी लिमिट, 25,000 करने पर सरकार कर रही है विचार, जानें अपडेट

Written by:Pooja Khodani
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EPFO: पिछली बार EPF वेतन सीमा में साल 2014 में बदलाव किया गया था। तब केंद्र सरकार ने इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया था। आईए जानते है अब आगे की क्या तैयारी है...
EPFO:  कर्मचारियों के लिए् अच्छी खबर! बढ़ सकती है सैलरी लिमिट, 25,000 करने पर सरकार कर रही है विचार, जानें अपडेट

1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की वेतन सीमा (Wage Ceiling) ₹10,000 बढ़ाने की चर्चा शुरू हो गई है। लंबे समय से कर्मचारी भी सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में ईपीएफ (EPF) में अनिवार्य रूप से शामिल होने की वेतन सीमा ₹15,000 प्रतिमाह है। जो कर्मचारी ₹15,000 से ज्यादा बेसिक सैलरी पाते हैं, उनके पास इन योजनाओं से बाहर निकलने का विकल्प होता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार वेतन सीमा को बढ़ाकर ₹25,000 करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और EPFO को चार महीने के भीतर वेतन सीमा में संशोधन पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। आखिरी बार साल 2014 में ईपीएफओ के द्वारा वेतन-सीमा में वृद्धि की गई थी। जो पहले ₹6500 प्रति माह थी, उसे बढ़ाकर ₹15000 प्रतिमाह किया गया था। यह बदलाव 1 सितंबर 2014 से लागू किया गया था।

वेतन सीमा बढ़ी क्या फायदा मिलेगा?

  • अगर वेतन-सीमा ₹15000 से बढ़ाकर ₹25000 करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो लाखों कर्मचारी EPFO के दायरे में आ सकेंगे। इससे प्राइवेट कंपनियों, छोटे उद्योगों और अर्ध-संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को सीधा लाभ मिल सकता है।
  • चुंकी EPF योगदान सैलरी के प्रतिशत के हिसाब से कैलकुलेट किया जाता है, ऐसे में वेतन-सीमा बढ़ने से हर माह सैलरी कम (Take-home salary) मिलेगी लेकिन रिटायरमेंट सेविंग (EPF) और पेंशन (EPS) में वृद्धि देखने को मिलेगी। प्रोविडेंट फंड जमा, पेंशन योगदान और इंश्योरेंस कवर सहित सभी EPFO ​​से जुड़े फ़ायदे रिवाइज्ड सैलरी लिमिट के हिसाब से हो जाएंगे। चर्चा है कि अगले महीने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ की बैठक में पेश किया जा सकता है । यहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे यह 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जा सकता है।

कैसे होता है कॉन्‍ट्र‍िब्‍यूशन?

ईपीएफओ के नियमों के अनुसार नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को हर महीने कर्मचारी के वेतन का 12-12 फीसदी योगदान करना अनिवार्य है। हालांकि, कर्मचारी का पूरा 12 फीसदी ईपीएफ खाते में जाता है, जबकि नियोक्ता का 12 फीसदी ईपीएफ (3.67 फीसदी) और ईपीएस (8.33 फीसदी) के बीच बंट जाता है। ईपीएफओ का कुल कोष वर्तमान में लगभग 26 लाख करोड़ रुपए है, और इसके सक्रिय सदस्यों की संख्या लगभग 7.6 करोड़ है