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UGC गाइडलाइंस पर SC की रोक के बाद प्रियंका चतुर्वेदी का सरकार पर हमला, बोलीं- ‘जनविरोध के प्रति असंवेदनशील’

Written by:Ankita Chourdia
Published:
सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC की विवादित इक्विटी गाइडलाइंस पर रोक लगाने के बाद राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इन दिशानिर्देशों को मनमाना बताते हुए कहा कि सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया है और वह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती रहेंगी।
UGC गाइडलाइंस पर SC की रोक के बाद प्रियंका चतुर्वेदी का सरकार पर हमला, बोलीं- ‘जनविरोध के प्रति असंवेदनशील’

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नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की विवादित इक्विटी गाइडलाइंस पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के बाद शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत का यह हस्तक्षेप आवश्यक था, क्योंकि ये दिशानिर्देश अस्पष्ट और मनमाने थे।

प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर अपनी जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार का इन गाइडलाइंस पर हस्तक्षेप न करना और उन्हें वापस न लेना यह दिखाता है कि वह जनविरोध और प्रदर्शनों के प्रति कितनी असंवेदनशील है।

‘न्याय के खिलाफ आवाज उठाती रहूंगी’

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बताया कि इस मुद्दे को उठाने पर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वह पीछे नहीं हटीं।

“इस मुद्दे को उठाने के दौरान मुझे ट्रोलिंग और गालियों का सामना करना पड़ा। लेकिन जो भी बात न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों के खिलाफ होगी, उसके विरुद्ध मैं आगे भी अपनी आवाज उठाती रहूंगी।” — प्रियंका चतुर्वेदी, राज्यसभा सांसद

उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे रखी, उनका मूल्यांकन समय करेगा, क्योंकि ऐसे मुद्दों पर खामोशी भी एक तरह का पक्ष लेना ही होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में UGC की इन गाइडलाइंस पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि ये नियम ‘अस्पष्ट’ हैं और इनके ‘दुरुपयोग की आशंका’ है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को इन नियमों को दोबारा स्पष्ट रूप से तैयार करने का निर्देश दिया है।

प्रियंका चतुर्वेदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब UGC की इन गाइडलाइंस को लेकर अकादमिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। कई छात्र संगठन और सामाजिक समूह इन दिशानिर्देशों का लगातार विरोध कर रहे हैं।