पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से जुड़ी एक बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के घोषित उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया है, जिसके बाद इस फैसले को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं और राजनीतिक पारा गरमा गया है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम पर अब तृणमूल कांग्रेस पार्टी का आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि फाल्टा विधानसभा सीट से जहांगीर खान द्वारा अपना नाम वापस लेने का यह निर्णय पूरी तरह से उनका निजी फैसला है और इसमें पार्टी का कोई हस्तक्षेप या आदेश नहीं था। पार्टी ने इस बात पर जोर दिया है कि यह कदम जहांगीर खान ने अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों के चलते उठाया है, न कि किसी संगठनात्मक रणनीति के तहत, जिससे यह साफ होता है कि टीएमसी इस मामले को एक व्यक्तिगत चुनाव के रूप में देख रही है और इससे खुद को अलग कर रही है।
तृणमूल कांग्रेस ने इस अवसर पर राज्य में मौजूदा राजनीतिक माहौल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं, पार्टी का कहना है कि 4 मई को चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद से ही पश्चिम बंगाल में, विशेषकर फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में, हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उन पर दबाव बनाया जा रहा है। टीएमसी ने दावा किया है कि इस दौरान 100 से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया जा चुका है, जिससे क्षेत्र में एक भय का माहौल बना हुआ है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया तथा राजनीतिक स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह गिरफ्तारी का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे कार्यकर्ताओं में असुरक्षा की भावना पनप रही है।
फाल्टा में TMC कार्यालयों में तोड़फोड़ और कब्जे का आरोप
पार्टी ने आगे बताया कि चुनाव परिणाम आने के बाद से फाल्टा में दिन-दहाड़े कई पार्टी दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई है, उन्हें जबरन बंद कर दिया गया है और कुछ पर तो अवैध रूप से कब्जा भी कर लिया गया है, जिससे कार्यकर्ताओं को अपने लोकतांत्रिक कार्यों को करने में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें अपना काम करने से रोका जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने इस बात पर भी गहरा रोष व्यक्त किया है कि इन सभी घटनाओं और बार-बार शिकायतें दर्ज कराए जाने के बावजूद, चुनाव आयोग (EC) ने इस पूरे मामले पर अपनी आँखें मूंद रखी हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जो उसकी निष्पक्षता और संवैधानिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिससे राजनीतिक दलों में उसकी भूमिका को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।
BJP सरकारी एजेंसियों के जरिए फैला रही डर: तृणमूल कांग्रेस
ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी ने मौजूदा दबावपूर्ण स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि इतने प्रतिकूल और डरावने माहौल के बावजूद, हमारे अधिकांश कार्यकर्ता चट्टान की तरह अडिग खड़े हैं और विभिन्न सरकारी एजेंसियों तथा प्रशासन का इस्तेमाल करके भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा फैलाए जा रहे डर का लगातार बहादुरी से मुकाबला कर रहे हैं। हालांकि, पार्टी ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ कार्यकर्ता और उम्मीदवार इस अत्यधिक दबाव और उत्पीड़न के आगे आखिरकार झुक गए हैं और उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का कठिन फैसला ले लिया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जमीनी स्तर पर स्थितियाँ कितनी चुनौतीपूर्ण और भयावह हैं। पार्टी का मानना है कि यह स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
तृणमूल कांग्रेस ने इन सभी घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘बांग्ला विरोधी’ भाजपा की रणनीति का हिस्सा बताया है और स्पष्ट किया है कि हमारी पार्टी इस दमनकारी राजनीति के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी। पार्टी ने संकल्प लिया है कि यह लड़ाई, चाहे वह पश्चिम बंगाल की धरती पर हो या दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में, भाजपा की जनविरोधी नीतियों और लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन के खिलाफ तब तक जारी रहेगी जब तक न्याय स्थापित नहीं हो जाता और बंगाल के लोगों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता। टीएमसी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी आह्वान किया है कि वे इस मुश्किल समय में एकजुट रहें और लोकतंत्र को बचाने की इस लड़ाई में अपना योगदान देते रहें, क्योंकि पार्टी का मानना है कि यह केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि बंगाल की अस्मिता और स्वाभिमान की लड़ाई है, जिसके लिए वे हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।
The decision taken by Jahangir Khan to withdraw from the Falta re-poll is his personal decision and not that of the party.
Since the election results were declared on 4th May, more than 100 of our party workers have been arrested in Falta AC alone. Several party offices have…
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) May 19, 2026





