नई दिल्ली: अपने जन्मदिन को पारंपरिक तरीके से मनाने के बजाय, जब अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और धर्मों से आए 17 दोस्तों ने मिलकर कुंभ के अनुभव को समझने का फैसला किया, तो यह एक अनूठी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत थी। इसी यात्रा के गहरे अनुभवों को समेटकर लेखक याकूब मैथ्यू ने ‘Seeking The Infinite’ पुस्तक की रचना की है, जिसका विमोचन दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में आयोजित एक गरिमामय समारोह में किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ रहे, जबकि इसका संचालन दिलीप चेरियन ने किया। इस अवसर पर साहित्य, कला और विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों से जुड़ी कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं।
‘यह किताब नहीं, बल्कि एक जागरण है’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि यह केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं, बल्कि एक अनुभव का उत्सव है। उन्होंने लेखक याकूब मैथ्यू की प्रशंसा करते हुए कहा, “वे एक सफल बैंकर और वैश्विक प्रोफेशनल हैं, लेकिन उन्होंने व्यावसायिक दुनिया के शोर के बीच भी अपने भीतर की शांति और खोज को जीवित रखा।”
उन्होंने 17 दोस्तों की कुंभ यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यह किताब किसी एक घटना का वर्णन नहीं करती, बल्कि एक जागरण को दर्शाती है।
“यह किताब हमें याद दिलाती है कि हम भाषा, संस्कृति और भौगोलिक सीमाओं से अलग दिखते जरूर हैं, लेकिन भीतर से एक ही सत्य से जुड़े हैं। अनंत कोई दूर की चीज नहीं है, वह हमारे भीतर है।”- जगदीप धनखड़, पूर्व उपराष्ट्रपति
धनखड़ ने यह भी कहा कि सह-लेखिका शिल्पा की संवेदनशीलता और चिंतन इस किताब के हर पन्ने पर महसूस होता है, जो इसे और भी गहरा बनाती है।
अनंत एक मंजिल नहीं, बल्कि एक यात्रा है: याकूब मैथ्यू
पुस्तक के लेखक याकूब मैथ्यू ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भारत की परंपरा और संस्कृति हमारी सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर है। उन्होंने कहा, “जब कोई व्यक्ति पूरी पवित्रता से कुछ करता है, तो वह नदी की तरह अंत में समुद्र तक पहुंचता है।”
उन्होंने सरल शब्दों में किताब का सार समझाते हुए कहा, “अनंत यानी ईश्वर का कोई एक तय स्थान नहीं है। वह कोई मंजिल नहीं, बल्कि एक यात्रा है, जो हमारे भीतर चलती है। जैसे समुद्र का पानी और बोतल का पानी अलग दिखता है, लेकिन असल में दोनों एक ही हैं, वैसे ही हम सब उसी अनंत का हिस्सा हैं।”
कुंभ का अनुभव तस्वीरों और शब्दों में
कार्यक्रम के मॉडरेटर दिलीप चेरियन ने कहा कि जो लोग 144 साल बाद होने वाले महाकुंभ में नहीं पहुंच पाए, उनके लिए यह किताब उस अनुभव को महसूस करने का एक बेहतरीन माध्यम है। उन्होंने कहा, “किताब में कुंभ का अनुभव बहुत सुंदर तरीके से पेश किया गया है और इसकी तस्वीरें बेहद प्रभावशाली हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धर्म लोगों को बांटने के लिए नहीं, बल्कि जोड़ने के लिए होता है और कुंभ का अनुभव इसी एकता का प्रतीक है।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि ‘Seeking The Infinite’ भौतिक सफलता और आत्म-चिंतन के बीच एक सेतु का काम करती है और यह पाठकों को उपदेश देने के बजाय सोचने के लिए प्रेरित करती है।





