आज से फ्रांस के एवियन शहर में 52वीं G7 समिट की शुरुआत हो गई है। दरअसल 17 जून तक चलने वाले इस सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता एक मंच पर जुटे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन पहले ही फ्रांस पहुंच चुके हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज स्लोवाकिया से एवियन पहुंचेंगे और विभिन्न देशों के नेताओं के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लेंगे।
दरअसल समिट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। वहीं इस दौरान मैक्रों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत करते हुए इसे वैश्विक स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। सम्मेलन के दौरान यूक्रेन युद्ध, ईरान से जुड़े हालात, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और नई तकनीकों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
भारत की भूमिका क्यों अहम मानी जा रही?
हालांकि भारत G7 का सदस्य देश नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जाता रहा है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को देखते हुए इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है। समिट के दौरान उनकी कई द्विपक्षीय बैठकों पर भी नजर रहेगी। जानकारी दे दें कि प्रधानमंत्री मोदी का यह विदेश दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह उनके कार्यकाल का 100वां विदेशी दौरा है। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अब तक 78 देशों की यात्रा की है। मोदी पहली बार 2019 में G7 सम्मेलन में शामिल हुए थे और उसके बाद लगातार इस मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। इस बार भी भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रख सकता है। इसके अलावा अमेरिका, फ्रांस और अन्य प्रमुख देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकों की भी संभावना जताई जा रही है।
G7 समिट का दुनिया पर असर
दरअसल इस बार G7 समिट ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक बदलावों से गुजर रही है। सम्मेलन में यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व की स्थिति, होर्मुज समुद्री मार्ग की सुरक्षा, ईरान से जुड़े मुद्दे और वैश्विक आर्थिक चुनौतियां प्रमुख विषय बने हुए हैं। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं।
जानकारी दे दें कि G7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। हर साल सदस्य देश बारी-बारी से इसकी मेजबानी करते हैं। इस मंच पर लिए गए फैसले और जारी किए गए संयुक्त बयान अक्सर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर असर डालते हैं।






