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क्या लोकतंत्र केवल आपकी जीत का पैमाना बनकर रह गया है? धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर बोला तीखा हमला, दे डाली ये नसीहत

Written by:Gaurav Sharma
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस और राहुल गांधी के 'चुनिंदा आक्रोश' को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा, कांग्रेस के लिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता केवल उनके नतीजों पर निर्भर करती है।
क्या लोकतंत्र केवल आपकी जीत का पैमाना बनकर रह गया है? धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर बोला तीखा हमला, दे डाली ये नसीहत

देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पार्टी की चुनावी हार पर संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी के ‘चुनिंदा आक्रोश’ पर कड़ा प्रहार किया। सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रधान ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस की नीति को लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक करार दिया। उन्होंने कांग्रेस पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के लिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता केवल उनकी जीत-हार के नतीजों पर ही निर्भर करती है। यह दोहरी नीति लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है।

धर्मेंद्र प्रधान ने ‘सिलेक्टिव आउटरेज’ यानी ‘चुनिंदा आक्रोश’ को लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताया। उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी को टैग करते हुए यह सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस यह मानती है कि लोकतंत्र की ‘वैधता’ का बटन तभी चालू होता है जब चुनावी नतीजे उनके पक्ष में आते हैं? प्रधान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब केरल जैसे राज्य में आपकी पार्टी जीत हासिल करती है, तो वही चुनाव आयोग कांग्रेस की नजर में निष्पक्ष और पूरी तरह पारदर्शी हो जाता है। लेकिन जैसे ही उन्हें अन्य राज्यों में हार का सामना करना पड़ता है, वही पूरी चुनावी प्रक्रिया ‘हथियाया गया जनादेश’ और ‘चोरी’ करार दे दी जाती है। उन्होंने कांग्रेस से सीधा सवाल किया कि क्या लोकतंत्र केवल आपकी जीत का पैमाना बनकर रह गया है?

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग देश की एक स्वायत्त और संवैधानिक संस्था है। इस संस्था ने दशकों से देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सफलतापूर्वक कराए हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इसी सुव्यवस्थित चुनावी व्यवस्था के तहत भाजपा, कांग्रेस और देश के तमाम क्षेत्रीय दलों को सत्ता में आने का अवसर मिला है। इस संस्था पर बार-बार सवाल उठाना लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने जैसा है।

प्रधान ने कांग्रेस के इन आरोपों को करोड़ों मतदाताओं का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से लेकर असम तक, चुनावी नतीजों को शक की नजर से देखना देश के करोड़ों मतदाताओं की पसंद और उनकी बुद्धिमत्ता का सीधा अपमान है। यह जनता के फैसले पर अविश्वास जताने जैसा है।

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि हार के बाद अपनी कमियों पर आत्मचिंतन करने के बजाय संस्थाओं को बदनाम करना कांग्रेस की एक पुरानी और दुखद आदत बन चुकी है। यह प्रवृत्ति स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपना तीखा हमला जारी रखते हुए कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में अगर कुछ ‘फिक्स्ड’ यानी तयशुदा नजर आता है, तो वह है “कांग्रेस का चुनावी हकीकत से पूरी तरह टूट चुका रिश्ता”। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनादेश को स्वीकार न करना और बार-बार लोकतांत्रिक गरिमा को ठेस पहुँचाना यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कांग्रेस वास्तविकता से पूरी तरह कट चुकी है और जनता के मूड को समझने में विफल है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि बार-बार संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछालने से देश का लोकतंत्र मजबूत नहीं होता, बल्कि कमजोर ही होता है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को नसीहत दी कि लोकतंत्र में जनता का फैसला ही सर्वोपरि होता है और उसे विनम्रता से स्वीकार करना ही सच्ची राजनीतिक शुचिता और गरिमा है। जनता के निर्णय का सम्मान करना ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभिन्न अंग है।

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