हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, राज्य सरकार को दिए ये निर्देश, जल्द मिलेगा वेतन-भत्ते का लाभ

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गुवाहाटी,डेस्क रिपोर्ट। असम की गोवाहाटी हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने राज्य के होम गार्डों को बड़ी राहत दी। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 3 महीने के अंदर होमगार्डों को भी राज्य पुलिस कर्मियों के बराबर वेतन देने के निर्देश दिए है।

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गुवाहाटी हाई कोर्ट ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए असम सरकार को होमगार्ड ड्यूटी भत्ते को न्यूनतम वेतन के लिए भुगतान करने का निर्देश दिया है, जिसके लिए राज्य के पुलिस कर्मी हकदार हैं।हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 3 महीने की अवधि के भीतर अभ्यास पूरा करने को कहा है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने हाई कोर्ट को तर्क दिया कि वे असम होमगार्ड्स अधिनियम, 1947 की धारा 6 (3) (ए) के तहत नियुक्त होने के बाद होमगार्ड के रूप में सेवा कर रहे हैं। उन्होंने अपने कर्तव्य भत्ते में वृद्धि की मांग की। भारत में 23 राज्यों ने गृह रक्षक, होम गार्ड्स वेलफेयर एसोसिएशन (SUPRA) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पहले ही लागू कर दिया है, लेकिन असम राज्य ने इसे लागू नहीं किया है।असम में एक होमगार्ड को हर महीने 9,000 रुपये मिलते हैं।

इस पर न्यायमूर्ति माइकल जोथनखुमा की एकल पीठ द्वारा 8 अगस्त को पारित आदेश में कहा गया है कि  सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के मद्देनजर राज्य सरकार को होमगार्ड ड्यूटी भत्ते का भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है। दर, जिसमें से कुल 30 दिन (एक माह) न्यूनतम वेतन के लिए आता है जिसके लिए राज्य के पुलिस कर्मी हकदार हैं।यह अभ्यास इसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से 3 महीने की अवधि के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।

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हाई कोर्ट ने कहा कि इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि होमगार्ड्स को उनकी ड्यूटी के समय पुलिस कर्मियों की शक्ति के साथ अधिकार दिया गया है, ऐसे में राज्य सरकार द्वारा होम गार्डों को भी उन्हें ऐसी दरों पर शुल्क भत्ता का भुगतान करना चाहिए। जो कि बराबर है पुलिस कर्मियों का न्यूनतम 30 दिन का वेतन।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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