भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने देश में बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल को लेकर एक बड़ी पहल की है। अब तक डॉक्टरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विदेशी स्वास्थ्य मानकों की जगह ICMR भारतीय बच्चों और किशोरों के लिए अपने विशेष स्वास्थ्य मानक (Health Parameters) तय करेगा। इस कदम का मकसद बच्चों की बीमारियों का सटीक पता लगाना और उन्हें बेवजह के इलाज से बचाना है।
क्यों जरूरी हैं भारत-विशेष स्वास्थ्य मानक?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अब तक भारत में बच्चों के ब्लड टेस्ट समेत अन्य जांचों के लिए जो ‘नॉर्मल रेंज’ इस्तेमालyt होती है, वह काफी हद तक पश्चिमी देशों के डेटा पर आधारित है। लेकिन भारतीय बच्चों का खानपान, जीवनशैली, पोषण का स्तर और पर्यावरणीय कारक विदेशी बच्चों से बिल्कुल अलग होते हैं।
ऐसे में विदेशी मानकों के आधार पर भारतीय बच्चों की सेहत का आकलन करना कई बार गलत नतीजों की वजह बनता है, जिससे डायग्नोसिस में चूक और अनावश्यक इलाज की आशंका बनी रहती है।
11 बड़े संस्थानों में होगा अध्ययन
इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए ICMR देश के 11 प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा। इन संस्थानों में दिल्ली, भोपाल, गुवाहाटी, जोधपुर और कल्याणी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भी शामिल हैं। इन केंद्रों पर अलग-अलग उम्र के स्वस्थ बच्चों और किशोरों का डेटा इकट्ठा किया जाएगा।
इस अध्ययन में बच्चों के ब्लड टेस्ट, शारीरिक विकास के पैमाने, पाचन तंत्र से जुड़े संकेत और स्वास्थ्य से जुड़े अन्य जरूरी पैरामीटर्स को शामिल किया जाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य यह समझना है कि भारतीय बच्चों में सेहत के कौन से मानक सामान्य माने जाने चाहिए।
सही इलाज और नीति-निर्माण में मिलेगी मदद
एक बार यह डेटाबेस तैयार हो जाने के बाद डॉक्टरों के पास भारतीय बच्चों के लिए एक विश्वसनीय और सटीक रेफरेंस रेंज उपलब्ध होगी। इससे किसी भी बीमारी को शुरुआती स्तर पर पकड़ना आसान हो जाएगा और बच्चों को अनावश्यक दवाओं और इलाज से बचाया जा सकेगा।
इसके अलावा, यह व्यापक डेटा सरकार को बच्चों के पोषण, विकास और स्वास्थ्य से जुड़ी राष्ट्रीय नीतियां बनाने में भी एक मजबूत वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगा। कुल मिलाकर, ICMR का यह कदम भारत में बाल स्वास्थ्य की नींव को और मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।





