नई दिल्ली: भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला–2025 के मंच पर बुधवार को भारतीय हथकरघा और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा का जश्न शुरू हो गया। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम के हॉल नंबर-5 में विशेष प्रदर्शनी-कम-सेल का उद्घाटन किया। यह पवेलियन 27 नवंबर तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा।
इस वर्ष पवेलियन की थीम ‘वस्त्र कला: भारत की विरासत’ रखी गई है, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है। इसमें उत्तर की बनारसी बुनाई और राम दरबार के रूपांकन, दक्षिण की काष्ठ और रेशम कला, पूर्व की ओडिशा-बंगाल की पारंपरिक बुनाई और पश्चिम की कच्छ की नक्काशी व शीशाकारी कला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
बुनकरों-शिल्पकारों को सशक्त बनाने का लक्ष्य
मंडप का भ्रमण करने के बाद मंत्री गिरिराज सिंह ने बुनकरों और कारीगरों से संवाद किया। उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है, ताकि कारीगरों को बेहतर कच्चा माल, तकनीकी सहायता, डिजाइन और बाजार तक पहुंच मिल सके।
“हमारा उद्देश्य बुनकरों और शिल्पकारों की आजीविका और आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है, ताकि भारत वैश्विक हस्तशिल्प अर्थव्यवस्था में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को और आगे बढ़ा सके।” — गिरिराज सिंह, केंद्रीय वस्त्र मंत्री
इस अवसर पर वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
देशभर के 200 स्टॉलों पर कला का संगम
यह भव्य आयोजन नेशनल हैंडलूम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NHDC) द्वारा किया जा रहा है। प्रदर्शनी में 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 200 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां 53 विशिष्ट शिल्प प्रदर्शित किए जा रहे हैं। आगंतुक यहां कानी बुनाई और सजनी कढ़ाई जैसी कलाओं का लाइव प्रदर्शन भी देख सकते हैं।
इस पवेलियन की गरिमा पद्मश्री, संत कबीर, राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कारों से सम्मानित कारीगरों की उपस्थिति से और बढ़ गई है, जो अपनी उत्कृष्ट कृतियों के साथ यहां मौजूद हैं। यह प्रदर्शनी 14 से 27 नवंबर 2025 तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 7:30 बजे तक खुली रहेगी।






