कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में पिछले साल आयोजित आरक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा में “सुनियोजित ढंग से घोटाला” किया गया और यह मामला व्यक्तिगत नकल का नहीं, बल्कि संगठित रैकेट का प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारों के राज में व्यापम जैसे घोटाले बराबर जारी हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह भाजपा सरकार की खासियत है कि चाहे व्यापम घोटाला हो, जाए पटवारी भर्ती घोटाला हो, चाहे आरक्षक भर्ती घोटाला हो किसी भी घोटाले में कभी मुख्य षड्यंत्रकर्ता नहीं पकड़ा जाता। घोटाले का ख़ुलासा होने पर कुछ छोटी मछलियों को पकड़कर न्याय का नाटक किया जाता है।
क्या हैं मामला
मध्यप्रदेश में आयोजित आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा एक बार फिर विवादों में है। MPESB द्वारा कराई गई इस परीक्षा में रतलाम के एक केंद्र पर अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद 12 अभ्यर्थियों की अभ्यर्थिता निरस्त कर दी गई है और एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस घटनाक्रम ने राज्य की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
243 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में करीब 1.10 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद किए गए डेटा विश्लेषण और सीसीटीवी फुटेज की जांच में रतलाम पब्लिक स्कूल, विरियाखेड़ी केंद्र से जुड़े 12 अभ्यर्थियों का प्रदर्शन असामान्य पाया गया। जानकारी के अनुसार कुछ अभ्यर्थी शुरुआती लगभग 30 मिनट तक सिर्फ स्क्रीन स्क्रॉल करते रहे और फिर अंतिम 15 मिनट में 100 प्रश्न हल कर दिए, जिससे औसतन प्रति प्रश्न लगभग 9 सेकंड का समय बनता है। कुछ ने 100 प्रतिशत पर्सेंटाइल तक प्राप्त किया।
कमलनाथ ने लगाए आरोप
इस मामले पर कमलनाथ ने प्रदेश सरकार को घेरते हुए आरक्षक भर्ती परीक्षा में सुनियोजित ढंग से घोटाले की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों को पिछली परीक्षा में 50 पर्सेंटाइल भी नहीं मिले थे, वे इस बार 100 पर्सेंटाइल तक पहुंच गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अभ्यर्थियों ने मात्र 15 मिनट में पूरा प्रश्नपत्र हल कर लिया। उनके अनुसार, यह असामान्य परिणाम एक नवस्थापित परीक्षा केंद्र से जुड़े हैं, जिससे संदेह और गहरा होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह का फर्जीवाड़ा प्रशासनिक मिलीभगत के बिना संभव है। पूर्व सीएम ने कहा कि ‘भाजपा के शासन के कारण मध्यप्रदेश की उच्च शिक्षा और नौकरियों की पात्रता परीक्षाएं पूरी तरह संदिग्ध और अविश्वसनीय हो गई हैं। मध्यप्रदेश की पहचान घोटाला प्रदेश से बन गई है और प्रदेश के नौजवानों का भविष्य अंधेरे में जा रहा है।’






