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भारत-EU व्यापार समझौता फाइनल, PM मोदी ने बताया ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’, 99% सेक्टर होंगे कवर

Written by:Rishabh Namdev
Published:
भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन आज इसकी आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं। इस समझौते से 99% तक सेक्टर कवर होंगे, जिससे भारतीय निर्यात को 5 अरब डॉलर तक की बढ़त मिलने की उम्मीद है।
भारत-EU व्यापार समझौता फाइनल, PM मोदी ने बताया ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’, 99% सेक्टर होंगे कवर

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 18 साल से चल रही बातचीत के बाद आखिरकार मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लगने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन के बीच नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आज होने वाली मुलाकात के बाद इस ऐतिहासिक समझौते की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। इस डील को खुद प्रधानमंत्री मोदी ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बता चुके हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच बातचीत पूरी हो चुकी है और कुछ प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि दोपहर करीब 1:15 बजे एक संयुक्त प्रेस बयान जारी किया जाएगा, जिसमें इस समझौते की रूपरेखा सामने रखी जाएगी। कानूनी और संसदीय प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद यह समझौता अगले साल की शुरुआत तक लागू हो सकता है।

PM मोदी ने क्यों कहा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इंडिया एनर्जी वीक 2026 के उद्घाटन पर अपने वर्चुअल संबोधन में इस व्यापार समझौते के सफलतापूर्वक पूरा होने की पुष्टि की थी। उन्होंने इसे दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक मजबूत साझेदारी का प्रतीक बताया था।

“यह समझौता भारत और यूरोप के लोगों के लिए नई और बड़ी आर्थिक संभावनाएं खोलेगा। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक अच्छा उदाहरण भी बनेगा।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

पीएम मोदी ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ मिलकर दुनिया की कुल जीडीपी का लगभग 25% और वैश्विक व्यापार का करीब एक-तिहाई हिस्सा संभालते हैं। उन्होंने इस साझेदारी को मजबूत सप्लाई चेन बनाने और दुनिया को अधिक स्थिर बनाने की भारत की रणनीति का एक अहम हिस्सा बताया।

समझौते के दायरे में क्या-क्या?

यह FTA बेहद व्यापक है और इसमें 97% से 99% सेक्टरों को शामिल किया गया है। हालांकि, भारत ने अपने किसानों और डेयरी उद्योग के हितों की रक्षा के लिए कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को फिलहाल इस समझौते के दायरे से बाहर रखा है। बताया जा रहा है कि भारत 90% वस्तुओं पर टैक्स खत्म करने पर सहमत है, जबकि EU की मांग 95% वस्तुओं को टैक्स-फ्री करने की थी।

इसके अलावा, निवेश संरक्षण (Investment Protection) और जियो टैग (Geographical Indications) जैसे कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर बातचीत के अलग-अलग दौर चल रहे हैं।

भारत को कितना होगा फायदा?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस समझौते से आने वाले वर्षों में भारत के निर्यात में 3 से 5 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। यह फायदा मुख्य रूप से उन उत्पादों को मिलेगा, जहां टैरिफ कम होने या खत्म होने से भारतीय सामान यूरोपीय बाजारों में सस्ते हो जाएंगे।

वित्त वर्ष 2025 में भारत का EU को सबसे बड़ा निर्यात रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स (15 अरब डॉलर) का था। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक गुड्स (11.3 अरब डॉलर), टेक्सटाइल (7.6 अरब डॉलर), मशीनरी (5 अरब डॉलर), ऑर्गेनिक केमिकल्स (5.1 अरब डॉलर) और फार्मास्यूटिकल्स (3 अरब डॉलर) का स्थान रहा।

यूरोपीय संघ के लिए क्या है खास?

यूरोपीय संघ के लिए भारत एक विशाल और तेजी से बढ़ता उपभोक्ता बाजार है। इस डील से यूरोपीय वाइन और स्पिरिट्स पर लगने वाली 150-200% तक की भारी-भरकम ड्यूटी कम हो जाएगी, जिससे वे भारतीय बाजार में सस्ती होंगी। इसके अलावा, हाई-एंड मशीनरी, मेडिकल डिवाइस और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में यूरोपीय कंपनियों को भारत में बड़े निवेश और व्यापार के मौके मिलेंगे।