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सरकार ने संसद में बताए चौंकाने वाले आंकड़े, 5 सालों में 9 लाख भारतीयों ने छोड़ी नागरिकता

सरकार ने संसद में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। इसमें बताया क्या है कि पिछले कुछ सालों में 9 लाख भारतीय नागरिकता छोड़ चुके हैं। एक लिखित सवाल के जवाब में यह बात बताई गई।
Indian Citizenship

भारत सरकार ने संसद में एक चौंकाने वाली जानकारी साझा की है। इस जानकारी के तहत पिछले 5 सालों में करीब। 9 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है। राज्यसभा में किए गए एक लिखित सवाल के जवाब में सरकार ने यह बात कही है।

आपको बता दे कि केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आंकड़े पेश किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक करीब 896843 भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी है। 5 साल का जो डाटा सामने आया है उससे जाहिर है कि 2022 के बाद बहुत से लोग नागरिकता छोड़ रहे हैं। इस बीच उन फर्म पर भी ध्यान दिया गया है जो दक्षिण एशियाई देशों में नौकरी का लालच देकर भारतीयों को फंसाती है। इस तरह के मामले में कुल 6700 इंडियन को बचाया गया है। इन लोगों से साइबर क्राइम और अन्य फर्जी गतिविधियों जैसे काम करवाए जा रहे थे।

कब कितने लोगों ने छोड़ी नागरिकता

जो डाटा सामने आया है उसके मुताबिक साल 2020 में 50256, 2021 में 13370, 2022 में 225620, 2023 में 2160219 और 2024 में 267378 भारतीय नागरिकता छोड़ चुके हैं। 2011 से 2019 के बीच 11 लाख 90 हजार 194 लोगों ने नागरिकता का त्याग किया। 2011 में ये आंकड़ा 122819, 2012 में 120923, 2013 में 131405, 2014 में 129328, 2015 में 131489, 2016 में 141603, 2017 में 133049, 2018 में 134561 और साल 2019 में 144014 लोगों ने देश की नागरिकता छोड़ी है।

भारतीयों से प्राप्त शिकायत कितनी

इस बीच यह सवाल भी सामने आया कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों से कितनी शिकायत है आती है। इसके जवाब में विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि मंत्रालय को कुल 16127 शिकायत मिली है। इनमें से 11925 मदद पोर्टल और 4932 सीपीग्राम्स के माध्यम से दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा 3049 मामले सऊदी अरब से आए हैं। इसके बाद यूएई, मलेशिया, अमेरिका, ओमान, कनाडा, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया, कतर और ब्रिटेन है।

शिकायत का समाधान कैसे

विदेश मंत्री ने जानकारी दी है कि उनकी एक मजबूत तंत्र तैयार किया गया है। इसमें इमरजेंसी हेल्पलाइन से लेकर सोशल मीडिया की सहायता और वॉक इन सुविधा शामिल है। अधिकतर शिकायतों में मामला सीधे संवाद और विदेशी अधिकारियों के साथ समन्वय के जरिए सुलझा लिया जाता है।

कुछ मामले ऐसे होते हैं जिनमें अधूरी जानकारी और नियोक्ताओं का सहयोग ना होने की वजह से अदालत तक जाना पड़ता है। ऐसे में भारतीय दूतावास पैनल वकीलों के माध्यम से कानूनी सहायता उपलब्ध करवाते हैं। इसके लिए इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड मदद देता है। प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को मंत्री ने सरकार की प्राथमिकता बताया है। इसके लिए प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र एवं काउंसलर कैंप लगातार लगाए जाते हैं।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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