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भारत का इकलौता रेलवे स्टेशन, जिसका नहीं है कोई नाम, फिर भी रुकती हैं ट्रेनें, इस दिन रहती है छुट्टी!

Written by:Sanjucta Pandit
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जी हां! यह सुनने में काफी अजीब है, लेकिन यह बिल्कुल सच है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को इस प्रश्न का उत्तर अवश्य जानना चाहिए और सामान्य ज्ञान के लिहाज से भी इसका जवाब पता होना जरूरी है।
भारत का इकलौता रेलवे स्टेशन, जिसका नहीं है कोई नाम, फिर भी रुकती हैं ट्रेनें, इस दिन रहती है छुट्टी!

Indian Railways : भारतीय रेलवे विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है, जहां हर दिन लाखों की संख्या में यात्री सफर करते हैं। यह एक ऐसा माध्यम है, जो सस्ता और आरामदायक है। देश के हर कोने से रोजाना 1300 से अधिक ट्रेनें संचालित की जाती हैं, जो विभिन्न राज्यों से होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचती है। यह अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है।

सफर के दौरान यात्रियों को विभिन्न राज्यों की संस्कृति, खान-पान, भाषा, पहनावा-उढ़ावा से रूबरू होने का मौका मिलता है। बाहर का नजारा काफी सुंदर होता है। पहाड़, झील-झरने के बीचो-बीच ट्रेन का सफर आरामदायक होता है।

भारतीय रेलवे (Indian Railways)

आज हम आपको एक ऐसे रेलवे स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बनाम है और आश्चर्य की बात यह है कि यहां प्लेटफॉर्म भी है और ट्रेन भी रुकती हैं, लेकिन इसका नाम नहीं है। जी हां! यह सुनने में काफी अजीब है, लेकिन यह बिल्कुल सच है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को इस प्रश्न का उत्तर अवश्य जानना चाहिए और सामान्य ज्ञान के लिहाज से भी इसका जवाब पता होना जरूरी है।

बेनाम रेलवे स्टेशन (Railway Station)

दरअसल, रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल में स्थित है जो कि बर्धमान शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है। यह साल 2008 से ही बिना नाम के ऑपरेशनल है। यहां हर रोज ट्रेन भी रूकती है। यात्री चढ़ते और उतरते हैं, लेकिन इसका कोई नाम नहीं है। इस अनोखे रेलवे स्टेशन का नाम नहीं होने के पीछे “रैना” और “रैनागर” घर गांव के बीच का आपसी विवाद है। इंडियन रेलवे द्वारा जब यहां पर स्टेशन बनाया गया, तब “रैनागर” नाम रखा गया, लेकिन स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई और बोर्ड से नाम बदलने की मांग की। जिस कारण मामला अदालत में चला गया, तब से यह स्टेशन बिना नाम के ही चल रहा है।

सिर्फ 6 दिन आती है ट्रेन

बता दें कि यहां केवल बांकुड़ा-मसाग्राम पैसेंजर ट्रेन ही रुकती है। रविवार को यहां कोई ट्रेन नहीं आती, तब स्टेशन मास्टर अगले सप्ताह की बिक्री के लिए टिकट खरीदने बर्धमान शहर जाते हैं। हालांकि, यहां बिकने वाली टिकटों पर पुराना नाम “रैनागर” ही छपा होता है।

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