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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में राजनाथ सिंह ने कहा “श्रीमद्भागवतगीता सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, पूरे विश्व और मानवता के लिए है मार्गदर्शक”

Written by:Shruty Kushwaha
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केंद्रीय रक्षा मंत्री ने गीता के वैश्विक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसका दर्शन आज विश्वभर के विश्वविद्यालयों में शोध और अध्ययन का प्रमुख विषय बना हुआ है, जिससे उसकी सार्वभौमिकता और वैज्ञानिकता प्रमाणित होती है। कृष्ण का उपदेश कर्तव्य, आत्मज्ञान, योग, भक्ति और मानसिक संतुलन आज भी मानव जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान देने में पूरी तरह प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान मनुष्य के विचारों को शुद्ध करता है और सही दिशा देता है।
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में राजनाथ सिंह ने कहा “श्रीमद्भागवतगीता सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, पूरे विश्व और मानवता के लिए है मार्गदर्शक”

International Gita Mahotsav

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में सोमवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आज दुनियाभर में श्रीमद्भागवतगीता की स्वीकृति बढ़ रही है और कई विश्वविद्यालयों में इसपर रिसर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान पूरे विश्व और पूरी मानवता के लिए है।

15 नवंबर से प्रारंभ हुए अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में इस साल 50 से अधिक देश भागीदारी कर रहे हैं। ये महोत्सव पांच दिसंबर तक चलेगा। हरियाणा पर्यटन विभाग के अनुसार पिछले साल इस आयोजन में 35 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे और इस बार 50 लाख से ज्यादा लोगों के आने की उम्मीद है।

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल हुए राजनाथ सिंह

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गीता का ज्ञान की जीवन का असली समाधान दे सकता है। उन्होंने कहा कि “श्रीकृष्ण ने हजारों साल पहले बता दिया था कि मनुष्य का व्यवहार उसके विचारों से बनता है और विचारों का शुद्धिकरण भक्ति और योग से ही हो सकता है। आज दुनियाभर में गीता की स्वीकृति बढ़ रही है और कई विश्वविद्यालयों में इसपर रिसर्च भी हो रही है। गीता का ज्ञान पूरे विश्व के लिए है। गीता सिर्फ आध्यात्मिक या धार्मिक ग्रंथ नहीं है बल्कि ये हम सबके लिए लाइफ गाइड है।”

श्रीमद्भागवतगीता में छिपा है जीवन का सार

बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव गीता जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। कुरुक्षेत्र वह पवित्र भूमि है जहाँ भगवान कृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन को भगवद गीता का दिव्य ज्ञान दिया था। श्रीमद्भागवतगीता हिन्दू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला ग्रंथ है। यह विश्व के सभी प्रमुख धर्मग्रंथों में सबसे अधिक भाषाओं में अनुवादित और व्याख्या किया गया ग्रंथ है। धार्मिक मान्यतानुसार, कुरुक्षेत्र में पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध प्रारंभ से पहले अपने गुरुओं, सगे-संबंधियों और मित्रों को सामने देखकर अर्जुन मोह व विषाद से भर जाते हैं और कहते हैं कि युद्ध नहीं करेंगे। उस समय भगवान श्रीकृष्ण उन्हें आत्मा, कर्तव्य, जीवन, मृत्यु, कर्म, योग और मोक्ष का दार्शनिक उपदेश देते हैं। वही उपदेश  श्रीमद्भागवतगीता है। यह उपदेश न सिर्फ अर्जुन के संशय और विषाद का समाधान है, बल्कि मानव जीवन के संघर्षों का शाश्वत समाधान भी माना जाता है।