ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) की लगातार असफलताओं और कुछ महीनों की खामोशी के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की ओर एक और उपलब्धि हासिल की है। इसरो ने दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसकी जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी है।
यह महत्वपूर्ण परीक्षण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष स्टेशन में किया गया। इस सफल परीक्षण के बावजूद, इसरो की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। टेस्ट की सफलता की पुष्टि केवल केंद्रीय मंत्री के बयान से हुई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी इसरो की बधाई
डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इसरो को बधाई दी। उन्होंने लिखा,
“भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान गगनयान के लिए अगले वर्ष होने वाले इसरो के इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) की सफल सफलता पर इसरो को बधाई। यह परीक्षण सतीश धवन अंतरिक्ष स्टेशन श्रीहरिकोटा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह गगनयान मिशन की तैयारियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।” (डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री)
भारत का महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान 2027 में श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में तकनीकी जटिलताओं के कारण कई बार देरी हुई है। हालांकि, भारत इस मिशन के लिए आवश्यक सभी क्षमताओं को स्वदेशी रूप से विकसित कर रहा है। अंतरिक्ष मिशन से जुड़ी ऐसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को गोपनीय रखा जाता है और दुनिया का कोई भी देश इन्हें आसानी से साझा नहीं करता है, जिससे भारत के लिए अपनी क्षमताएं खुद विकसित करना और भी अहम हो जाता है।
गगनयान मिशन: तैयारी और बजट
सरकार ने गगनयान कार्यक्रम के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है। यह मिशन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। पहली मानवयुक्त उड़ान 2027 की पहली तिमाही में होने की उम्मीद है। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक ऐतिहासिक पल होगा, जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में कदम रखेंगे।
इससे पहले, 8 अप्रैल को, इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने स्मार्ट स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस पर दूसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए कहा था कि मानवरहित गगनयान मिशन की सभी तैयारियां सुचारू रूप से चल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा, “हम पहले मानवरहित गगनयान मिशन से ठीक पहले मिल रहे हैं। यह कोई साधारण मिशन नहीं, बल्कि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन है।”
नारायणन ने स्पष्ट किया था कि अंतिम मानवयुक्त प्रक्षेपण से पहले तीन मानवरहित मिशन होंगे। पहले मानवरहित मिशन की सभी गतिविधियां अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं, हालांकि कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। इन मानवरहित मिशनों के सफल होने के बाद ही मानवयुक्त उड़ान की हरी झंडी दी जाएगी, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस पृष्ठभूमि में, IADT-02 की सफलता गगनयान मिशन की तैयारी में एक अहम पड़ाव है। यह दर्शाता है कि इसरो मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है, भले ही उसे तकनीकी चुनौतियों और बाहरी दबावों का सामना करना पड़ रहा हो। यह टेस्ट क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी और लैंडिंग क्षमताओं को परखने के लिए महत्वपूर्ण है, जो मानव मिशन की सफलता के लिए अनिवार्य है।
Congratulations #ISRO for the successful accomplishment of Second Integrated Air Drop Test (IADT-02) for #Gaganyaan, India’s first Human Space flight scheduled next year.
The second Integrated Air Drop Test (IADT-02) was successfully conducted at Satish Dhawan Space Station…
— Dr Jitendra Singh (@DrJitendraSingh) April 10, 2026






