भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) साल 2026 का शानदार आगाज करते हुए इतिहास रचने जा रहा है। ISRO सोमवार, 12 जनवरी 2026 को PSLV-C62 रॉकेट लॉन्च करेगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य EOS-N1 उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करना है, जिसे कोड नाम ‘अन्वेषा’ (Anvesha) दिया गया है। यह सैटेलाइट DRDO द्वारा विकसित किया गया है। यह सैटेलाइट भारत की निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा। मिशन की जानकारी ISRO ने सोशल मीडिया एक्स पर दी।
बता दें कि इस मिशन के लिए 25 घंटे की उलटी गिनती 11 जनवरी को शुरू होगी। यह पीएसएलवी की 64वीं उड़ान होगी। इसरो ने बताया कि पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का निर्माण थाईलैंड और ब्रिटेन ने संयुक्त रूप से किया है। पूरा मिशन प्रक्षेपण के बाद दो घंटे से अधिक समय तक चलेगा।
EOS-N1 सैटेलाइट को लॉन्च करने का उद्देश्य
EOS-N1 एक स्पेसक्राफ्ट है जो पृथ्वी की कक्षा में घूमते हुए तस्वीरें लेगा। इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर लगे हैं, जो साधारण कैमरों से ज्यादा स्मार्ट हैंते। साधारण कैमरे या मानव आंख सिर्फ लाल, हरा और नीला रंग देखते हैं, लेकिन हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर सैकड़ों पतले स्पेक्ट्रल बैंड कैप्चर करते हैं। ये बैंड मानव आंख या स्टैंडर्ड कैमरों से दिखाई नहीं देते।
बता दें कि इस सैटेलाइट की मदद से धरती पर किस खेत में पानी की कमी है, कहां फसल बीमार है और कहां सूखे का खतरा मंडरा रहा है, जानकारी प्राप्त करेंगे। चक्रवात, बाढ़ और जंगल की आग से पहले चेतावनी मिलेगी ताकि तबाही से पहले तैयारी हो सके।
14 अन्य पेलोड भी होंगे लॉन्च
PSLV-C62 रॉकेट EOS-N1 के साथ 14 अन्य पेलोड को भी अंतरिक्ष में ले जाएगा। यह मिशन इसरो की कमर्शियल शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआइएल) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस मिशन के साथ भारतीय धरती से लांच किए गए विदेशी उपग्रहों की कुल संख्या 442 हो जाएगी।
14 अन्य पेलोड भी होंगे लॉन्च
PSLV-C62 रॉकेट EOS-N1 के साथ 14 अन्य पेलोड को भी अंतरिक्ष में ले जाएगा। जो अलग अलग देशों के हैं। यह मिशन ISRO की कमर्शियल शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआइएल) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस मिशन के साथ भारतीय धरती से लांच किए गए विदेशी उपग्रहों की कुल संख्या 442 हो जाएगी।
साल 2026 में ISRO के बड़े मिशन
ISRO के लिए साल 2026 बेहद की महत्वपूर्ण है क्योंकि ISRO मार्च 2026 तक अपने 7 मिशन पूरा करेगा। इसमें बिना क्रू वाले रोबोटिक टेस्ट और ग्रहों की खोज जैसे महत्वाकांक्षी मिशन शामिल हैं। इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि भारत एक क्षेत्रीय खिलाड़ी से एक प्रमुख वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनने की राह पर है। उन्होंने हाल ही में सफल LVM3-M6 मिशन के बाद एक बयान में यह बात की। LVM3-M6 मिशन, लॉन्च व्हीकल मार्क-III की छठी ऑपरेशनल उड़ान थी।
भारत का भरोसेमंद PSLV
भारत अपने ज्यादा मिशन पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) की सहायता से लॉन्च करता है। PSLV को भारत का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है। चंद्रयान-1 और मार्स ऑर्बिटर जैसे मिशन PSLV की मदद की पूरे हुए हैं। भारत पहले भी कई उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया है।
भारत पहले भी भेज चुका है एक साथ कई सैटेलाइट
भारत 15 फरवरी 2017 को श्रीहरिकोटा से विश्वसनीय रॉकेट PSLV-C37 की सहायता से ही एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है। जिसमें से 103 सह-यात्री नैनो-सैटेलाइट, जिनमें से 101 अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों (जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, आदि) के थे और दो भारत के थे।
PSLV-C62 will carry EOS-N1 and 15 co-passenger satellites.
EOS-N1 and 14 co-passengers are planned for injection into Sun Synchronous Orbit; the KID capsule is planned for a re-entry trajectory.
🗓️ 12 Jan 2026 | 🕘 09:45 IST onwards
🚀 Liftoff at 10:18:30 ISTLivestream link:… pic.twitter.com/PZrd1CpgR8
— ISRO (@isro) January 11, 2026





