कश्मीर घाटी में सोमवार को सुरक्षा व्यवस्था अचानक और सख्त दिखी। ईरान में खामेनेई की मौत की खबर के बाद शिया समुदाय के प्रदर्शनों के मद्देनजर श्रीनगर के संवेदनशील हिस्सों में आवाजाही सीमित की गई, जबकि लाल चौक को प्रशासन ने पूरी तरह सील कर दिया। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर के प्रमुख जंक्शनों पर बैरिकेड और तारबंदी कर दी है।
रविवार से शुरू हुए प्रदर्शनों का असर सोमवार को भी जारी रहा। श्रीनगर सहित घाटी के अलग-अलग हिस्सों में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी और जुटान की कोशिशों के बीच प्रशासन ने एहतियातन भीड़ नियंत्रण की रणनीति अपनाई। कई इलाकों में लोगों की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाई गई है, खासकर वहां जहां शिया आबादी अधिक है।
शिक्षण संस्थान बंद, परीक्षाएं रोकी गईं
स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने आज से खुलने वाले सभी स्कूल-कॉलेजों में दो दिन की छुट्टी घोषित की है। जिन परीक्षाओं का कार्यक्रम चल रहा था, उन्हें भी स्थगित कर दिया गया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि हालात सामान्य होने के बाद ही नए शेड्यूल के साथ परीक्षाएं कराई जाएंगी। यह फैसला एहतियाती बताया जा रहा है ताकि छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की आवाजाही से अतिरिक्त भीड़ न बने।
घाटी में कई परिवारों ने दिनभर बच्चों को घरों में ही रखा। सार्वजनिक परिवहन और बाजारों पर भी सुरक्षा उपस्थिति का असर देखा गया। अधिकारियों ने कहा है कि यह व्यवस्था अस्थायी है और सुरक्षा आकलन के आधार पर प्रतिबंधों में बदलाव किया जाएगा।
लाल चौक तक सभी पहुंच मार्ग बंद, बहु-स्तरीय सुरक्षा तैनाती
प्रशासन ने लाल चौक तक पहुंचने वाले सभी मुख्य रास्तों को बंद रखा है। शहर के भीतर कई संवेदनशील बिंदुओं पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है, और सड़कों पर पुलिस के साथ सेना की मौजूदगी भी बढ़ाई गई है। अधिकारियों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों को बड़े समूह में इकट्ठा होने से रोकने के लिए अग्रिम तैनाती की गई है ताकि किसी भी गड़बड़ी से तत्काल निपटा जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों ने शिया बहुल इलाकों में मल्टीपल लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने के साथ कंट्रोल रूम से रियल-टाइम इनपुट लिए जा रहे हैं। इसी बीच, मोबाइल इंटरनेट स्पीड बहुत कम रखे जाने की भी जानकारी सामने आई है, जिसे प्रशासनिक सतर्कता का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और हड़ताल की कॉल
अयातुल्लाह के मारे जाने की खबर के बाद कश्मीर के कई प्रमुख नेताओं ने इजरायली हमले की निंदा की है। अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने सोमवार के लिए हड़ताल की कॉल दी, जिसका समर्थन जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती ने किया। इन राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बाद प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त फोकस रखा और जिलों में भी सुरक्षा निर्देश कड़े किए।
घाटी के दूसरे जिलों में भी वही मॉडल अपनाया गया है जो श्रीनगर में दिखा-चौराहों पर अवरोध, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त तैनाती, और सार्वजनिक जुटान पर सख्त नजर। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता शांति बनाए रखना है और किसी भी उकसावे या अफवाह पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अपील
“सभी समुदाय शांति बनाए रखें और ऐसे किसी भी कदम से बचें जिससे तनाव या अशांति बढ़े।”- मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईरान में चल रहे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताते हुए लोगों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ईरान में मौजूद जम्मू-कश्मीर के निवासियों और छात्रों की सुरक्षा को लेकर विदेश मंत्रालय के संपर्क में है। सरकार का संदेश साफ है: स्थानीय स्तर पर शांति, और विदेश में मौजूद नागरिकों के लिए समन्वित सहायता।
फिलहाल घाटी में प्रशासनिक रणनीति दो स्तर पर दिख रही है-एक तरफ कानून-व्यवस्था के लिए कड़ा जमीनी प्रबंधन, दूसरी तरफ शिक्षा और नागरिक गतिविधियों में अस्थायी रोक के जरिए भीड़ और तनाव को सीमित करना। अगले 48 घंटे को अहम माना जा रहा है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर स्कूल खोलने, परीक्षाओं के नए कैलेंडर और शहरी प्रतिबंधों पर आगे का फैसला लिया जाएगा।






