उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों अच्छी खबर है। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार वर्ष 2026-27 के लिए नई तबादला नीति (Transfer Policy) लागू करने की तैयारी में है। कार्मिक विभाग इसका प्रस्ताव तैयार करने में जुट गया है, जिसे अप्रैल अंत या मई के पहले हफ्ते में होने वाली कैबिनेट बैठक में लाया जा सकता है। यहां से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में एक निश्चित अवधि में तबादले किए जाएंगे।
बता दें कि पिछले साल 2025 में 15 मई से 15 जून 2025 तक सभी विभागों में तबादले के आदेश दिए गए थे। खबर है कि नई नीति के तहत, ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जो एक ही जिले में 3 साल पूरे कर चुके हैं, या एक ही मंडल में 7 साल का समय बिता चुके हैं, उनका तबादला होना तय है। आकांक्षी जिलों और विकास खंडों में रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरा जाएगा।
इसके अलावा कर्मचारियों के तबादले के लिए एक सीमा भी तय की जाएगी। इसके तहत समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों के लिए कुल कार्यरत संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। वहीं, समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत तक रहने की संभावना है। हालांकि समूह ‘क’ के अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनाती नहीं मिलेगी। यदि अधिकारी मंडल स्तर का है, तो उसे उसके गृह मंडल में भी नियुक्त नहीं किया जाएगा।
इन कर्मचारियों को मिलेगी प्राथमिकता
- माना जा रहा है कि नई तबादला नीति में पति-पत्नी व दिव्यांगों को राहत दी जा सकती है। पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर यथासंभव एक ही जिले में उनका तबादला किया जा सकता है।
- यदि कोई दिव्यांग कर्मचारी स्वयं तबादला चाहता है तो उसे अपनी पसंद के जिले में प्राथमिकता के आधार पर तैनाती दी जाएगी। 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारियों को सामान्य तबादलों से मुक्त रखा जा सकता है।
- यदि किसी कर्मचारी के परिवार में कोई सदस्य गंभीर रूप से दिव्यांग है या गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
- इस बात पर भी जोर रहेगा कि जिन कर्मचारियों के बच्चे दिव्यांग हैं, उन्हें ऐसी जगह तैनाती दी जाए जहाँ वे बच्चे का अच्छे से इलाज और देखभाल हो सके। यानि दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती समुचित इलाज वाले स्थानों पर प्राथमिकता के आधार पर होगी.






