जनता दल यूनाइटेड के नेता एवं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मनोनीत सदस्य हरिवंश एक बार फिर राज्यसभा के उप सभापति चुन लिए हैं, वे अपने पिछले दो कार्यकाल के दौरान भी इस जिम्मेदारी को निभाते आये हैं अब उन्हें तीसरी बार फिर ये महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को बधाई दी है।
आज राज्यसभा में नेता सदन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने हरिवंश के नाम का प्रस्ताव रखा जिस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन में मौजूद सदस्यों से yes और no में जवाब मांगा और yes के आधार पर हरिवंश एक बार फिर राज्यसभा के उप सभापति चुन लिए गए, सभापति के निर्देश के बाद नेता सदन जेपी नड्डा और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हरिवंश को पीछे की सीट से आगे उनके लिए निर्धारित की गई सीट तक लेकर आये, जहाँ उन्होंने स्थान ग्रहण किया।
उप सभापति चयन प्रक्रिया के दरमियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में आये उन्होंने हरिवंश को उनके चयन के लिए बधाई दी, प्रधानमंत्री ने कहा मैं पूरे सदन की ओर से और अपनी ओर से आपको बधाई औए शुभकामनायें देता हूँ, राज्यसभा के सभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना आपने आप में इस सदन का आपके प्रति गहरा विश्वास दर्शाता है, पिछले कार्यकाल में आपके अनुभवों का जो लाभ सदन को मिला ये उसका भी प्रमाण है।
ये सहज कार्यशैली का सम्मान और उसकी स्वीकृति
प्रधानमंत्री ने कहा आपका सभी को साथ लेकर चलने का जो प्रयास रहा उस पर सदन ने आज फिर मोहर लगा दी है यह वास्तव में आपके अनुभव और योगदान का सम्मान है। यह एक अनुभव के सम्मान के साथ साथ सहज कार्यशैली का सम्मान है और उसकी स्वीकृति भी है। हम सबने हरिवंश के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए भी देखा है, पीएम ने कहा मुझे विश्वास है उप सभापति हरिवंश का नया कार्यकाल संतुलन और समर्पण के साथ आगे बढेगा और सदन की गरिमा को नई ऊंचाई प्राप्त होगी।
पीएम मोदी ने चन्द्रशेखर को याद किया
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्र शेखर को भी याद किया, उन्होंने कहा एक अबत का उल्लेख मैं जरुर करूँगा आज 17 अप्रैल है और 17 अप्रैल 1927 पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की जन्म जयंती है। विशेष बात ये है कि आज 17 अप्रैल को हरिवंश जब तीसरी बार उप सभापति के दायित्व को सँभालने जा रहे हैं चन्द्रशेखर के साथ आपका गहरा जुड़ाव और लगाव रहा है, एक प्रकार से आप पूरे कार्यकाल में उनके सहयात्री रहे हैं, ये एक सुखद संयोग है।






