डोडा, किश्तवाड़ और सियासी जिले की की गिनती जम्मू कश्मीर के आतंकग्रस्त इलाकों में होती है। अब यहां की महिलाओं ने खुद और दूसरों की रक्षा को जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है। हाथों में राइफल लिए ग्राम रक्षा दल की महिला सदस्य आतंकियों का सामना कर रही हैं।
इन इलाकों में सर्दियों में अधिकांश पुरुष सदस्य रोजी-रोटी कमाने के लिए हरियाणा, पंजाब, दिल्ली हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में चले जाते हैं। उनके पीछे महिलाएं यहां पर वीडीजी बनकर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती हैं। महिलाओं के दस्ते आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए जंगल में लगातार गश्त करते हैं।
दिया जाता है प्रशिक्षण
भद्रवाह पुलिस अधीक्षक विनोद शर्मा के मुताबिक इन महिला सदस्यों को नाका लगाने हथियार चलाने कष्ट करने और खतरों का आभास होने पर कार्रवाई करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। कई महिलाओं का प्रशिक्षण अभी भी जारी है। इन महिलाओं को थ्री-नॉट-थ्री राइफल दी जाती है क्योंकि यह जिन इलाकों में रहती हैं, वहां पर अत्यंत दुर्गम क्षेत्र है। महिलाओं को प्रशिक्षण देने हैं वाले पुलिस अधिकारी के मुताबिक अगर इन महिलाओं से बात की जाए तो पता चलता है कि वह देश की सुरक्षा संप्रभुता के लिए समर्पित हैं।
कई आतंकियों को किया ढेर
डोडा और किश्तवाड़ में कई बार ऐसा मौका आया है जब महिला वीडीजी ने पुरुष साथियों के साथ मिलकर आतंकियों को मार गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन जिलों में महिलाएं अपने पुरुष साथियों की गैर मौजूदगी में अपने गांव की रक्षा करने और आतंकियों का मुकाबला करने के लिए भरोसेमंद फोर्स के तौर पर पहचानी जाती हैं। इनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों सदस्य शामिल है जिन्हें जमीनी स्तर पर लड़ने की ट्रेनिंग दी गई है। इन महिलाओं की मौजूदगी से गांव में आतंकी दाखिल होने से परहेज करते हैं।





