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Tue, Dec 16, 2025

झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज! मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो विधायक की दिल्ली में भाजपा के बड़े नेताओं के साथ अहम बैठक

Written by:Rishabh Namdev
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28 नवंबर को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो विधायक कल्पना सोरेन अचानक दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। लगभग चार दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक उनकी वापसी नहीं हुई है, जिससे अब राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। झारखंड की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है अब सभी के मन में यह सवाल उठने लगा है।
झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज! मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो विधायक की दिल्ली में भाजपा के बड़े नेताओं के साथ अहम बैठक

इस समय झारखंड की राजनीतिक अटकलें तेज हो चुकी हैं। दरअसल 28 नवंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो विधायक कल्पना सोरेन दिल्ली रवाना हुए थे। राज्य स्थापना दिवस के बाद अचानक दोनों दिल्ली पहुंचे थे लेकिन अब चार दिन गुजर चुके हैं और इसके बाद भी झारखंड नहीं लौटे हैं जिसके चलते अब राजनीतिक गलियारों में सियासी हलचल बढ़ गई है। क्या झारखंड में कुछ बड़ा बदलाव होने जा रहा है, यह देखना दिलचस्प रहेगा।

दरअसल रिपोर्ट्स की मानें तो दिल्ली में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन की भाजपा के बड़े नेताओं के साथ एक अहम बैठक हुई है। इस बैठक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ चर्चा की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अब मुख्यमंत्री पद कल्पना सोरेन को दिया जा सकता है जबकि उपमुख्यमंत्री पद भाजपा के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है।

चार दिन से दोनों बड़े नेता दिल्ली में

इसके अलावा अब हेमंत सोरेन को केंद्र सरकार में मंत्री पद दिए जाने की चर्चा हो रही है। हालांकि इन दावों को भाजपा और झामुमो दोनों ही पार्टियों की ओर से खारिज किया गया है। लेकिन पिछले चार दिन से दोनों बड़े नेता दिल्ली में हैं आखिर इसका कारण क्या है सभी के मन में यह सवाल उठ रहा है। वहीं कांग्रेस की ओर से इस पूरे मामले को लेकर कहा गया है कि यह दावे पूरी तरह निराधार हैं। महागठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत है और मुख्यमंत्री 4 दिसंबर को रांची लौट जाएंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बैठक आखिर भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ क्यों हुई है इसके पीछे का असल सत्य अब तक सामने नहीं आया है।

5 दिसंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होगा

जानकारी दे दें कि 5 दिसंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। इससे पहले मुख्यमंत्री सत्ता पक्ष के विधायकों की बैठक लेंगे। लेकिन इससे पहले दिल्ली में भाजपा नेताओं के साथ हो रही बैठक राजनीति में चर्चाएं बढ़ा रही है। वहीं पिछले कुछ समय पर नजर डालें तो हेमंत सोरेन की चुनौतियां बढ़ी हैं। एक ओर ईडी की कार्रवाई देखने को मिली तो दूसरी ओर राज्य की वित्तीय स्थिति भी गंभीर है। राज्य में समय पर फंड की सबसे ज्यादा कमी है, जिसके चलते विकास योजनाएं भी रुक गई हैं। जबकि उपयोगिता प्रमाण पत्र रद्द हो जाने से केंद्र से मिलने वाली राशि भी अटकी पड़ी है। राज्य में सरकारी कर्मचारियों तथा संवेदकों को समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है।