कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए धर्मस्थल मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) से हटाकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने की मांग की है। उन्होंने 1 सितंबर से धर्मस्थल चलो आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। विजयेंद्र ने कहा कि राज्य सरकार के इस मामले को संभालने के तरीके से श्रद्धालुओं के मन में संदेह पैदा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने रातोंरात एसआईटी गठित करने का फैसला किया, जिसके पीछे के कारणों की जांच होनी चाहिए।
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विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि इस मामले में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साजिश रची गई है और इसमें विदेशी फंडिंग की संभावना भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की गिरफ्तारी से सच्चाई सामने आई है, जिसने झूठी जानकारी देकर जांच को गुमराह करने की कोशिश की थी। बीजेपी नेता ने दावा किया कि इस विवाद ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और बीजेपी तब तक दबाव बनाए रखेगी, जब तक जांच एनआईए को नहीं सौंपी जाती।
धर्मस्थल मंदिर प्रशासन
पुलिस सूत्रों के अनुसार, धर्मस्थल मंदिर प्रशासन के पूर्व स्वच्छता कार्यकर्ता, जिसने 70-80 शवों को कई स्थानों पर दफनाने का दावा किया था, को शनिवार को गिरफ्तार किया गया। उसने पुलिस को जो खोपड़ी दी थी, वह नकली निकली, जिसके बाद उसे झूठी गवाही और गलत सबूत देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। विजयेंद्र ने कहा कि इस मामले में शुरुआती चरण में जिला प्रभारी मंत्री दिनेश गुंडु राव ने सरकार पर भारी दबाव की बात कही थी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी साजिश की बात स्वीकारी थी।
सावधानीपूर्वक जांच जारी
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने विजयेंद्र की मांगों का जवाब देते हुए कहा कि एसआईटी इस जांच को संभालने में पूरी तरह सक्षम है और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सावधानीपूर्वक जांच कर रही है। उन्होंने एनआईए जांच की जरूरत से इनकार किया। उधर, बीजेपी ने इस मामले को लेकर अपनी रणनीति तेज कर दी है और 1 सितंबर को होने वाले धर्मस्थल चलो आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बढ़ाने की योजना बना रही है।