बांध की ऊंचाई बढ़ाने से तेलंगाना के पानी के हिस्से पर असर, के. कविता ने की सीएम से की हस्तक्षेप की मांग

तेलंगाना कांग्रेस नेता सामा राम मोहन रेड्डी ने बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव पर निशाना साधते हुए उन्हें गजनी करार दिया।
बांध की ऊंचाई बढ़ाने से तेलंगाना के पानी के हिस्से पर असर, के. कविता ने की सीएम से की हस्तक्षेप की मांग

तेलंगाना जागृति की प्रमुख के. कविता ने कर्नाटक सरकार के अलमट्टी बांध की ऊंचाई को पांच मीटर बढ़ाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम तेलंगाना के कृष्णा नदी के पानी के हिस्से को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। कविता ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से सुप्रीम कोर्ट में जाकर इस पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला तेलंगाना के सिंचाई जरूरतों के लिए बड़ा खतरा है, क्योंकि पहले से ही कृष्णा नदी का पानी अगस्त तक तेलंगाना के खेतों तक नहीं पहुंचता।

कविता ने शुक्रवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि बांध की ऊंचाई बढ़ाने से कृष्णा नदी का पानी तेलंगाना तक शायद ही पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा स्थगन आदेश का उल्लंघन करता है। कविता ने कहा, “यह एक ऐसा विकास है जिसे सुप्रीम कोर्ट में पहले ही रोका जा चुका है। दुर्भाग्यवश, कर्नाटक सरकार इस आदेश का उल्लंघन कर रही है। मैं मांग करती हूं कि तेलंगाना सरकार और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी तुरंत सुप्रीम कोर्ट में जाएं और इस गतिविधि को रोकें।”

केटी रामा राव पर साधा निशाना 

इस बीच, तेलंगाना कांग्रेस नेता सामा राम मोहन रेड्डी ने बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव पर निशाना साधते हुए उन्हें गजनी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केटीआर के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने ही तेलंगाना के पानी के अधिकारों से समझौता किया था। रेड्डी ने कहा कि केसीआर ने 299 टीएमसी पानी के लिए हस्ताक्षर किए, जबकि तेलंगाना का हक 500 टीएमसी से अधिक था। उन्होंने कहा, “आपके पिता ने ही तेलंगाना के किसानों को धोखा दिया। हमारी सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में अपने हक के लिए लड़ रही है।”

किसानों के लिए मौत का फरमान बताया

इससे पहले, केटी रामा राव ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर अलमट्टी बांध की ऊंचाई 519 फीट से 524 फीट करने के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने इसे तेलंगाना के किसानों के लिए मौत का फरमान बताया और आरोप लगाया कि यह कदम तेलंगाना को कृष्णा नदी के पानी से वंचित कर महबूबनगर, नलगोंडा और रंगा रेड्डी जिलों को रेगिस्तान में बदलने की साजिश है।

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