पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सोमवार को कोलकाता में एक अहम राजनीतिक मुलाकात हुई। मुख्य विपक्षी दल BJP के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग की फुल बेंच से मिलकर साफ कहा कि राज्य में मतदान एक, दो या अधिकतम तीन चरणों में कराया जाए, इससे अधिक चरणों की जरूरत नहीं है।
यह बैठक उस समय हुई है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग की पूरी टीम राज्य के दौरे पर है और चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रही है। आयोग के साथ चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी भी मौजूद हैं। अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दलों से मिलकर उनकी आशंकाएं और सुझाव लिए जा रहे हैं।
BJP ने 16 सूत्रीय मांग-पत्र में सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा बताया
पार्टी ने आयोग को 16 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा और कहा कि चुनाव के दौरान हिंसा-मुक्त माहौल सुनिश्चित करना सबसे जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल BJP नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने बताया कि पार्टी की प्राथमिक मांग चुनावी प्रक्रिया को सीमित चरणों में पूरा करने की है, ताकि लंबी चुनावी अवधि से जुड़ी आशंकाएं कम हों।
“हमने एक, 2 या 3 चरणों में चुनाव की मांग की थी, लेकिन इससे ज्यादा चरणों में नहीं हो।”- जगन्नाथ चट्टोपाध्याय
BJP की तरफ से यह भी कहा गया कि राज्य में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों की करीब 400 कंपनियों के इस्तेमाल का तरीका चिंता का विषय है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि राज्य पुलिस के जरिए केंद्रीय बलों को जिस तरह निर्देशित किया जा रहा है, उससे मतदाताओं में भरोसा बढ़ाने वाले मौजूदा उपाय अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे।
रूट मार्च और पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर भी आपत्ति
प्रतिनिधिमंडल में शामिल दूसरे नेताओं ने आयोग के सामने यह मुद्दा भी उठाया कि रूट मार्च संवेदनशील इलाकों के बजाय अपेक्षाकृत शांत क्षेत्रों में कराए जा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर लक्ष्य भयमुक्त मतदान है, तो संवेदनशील स्थानों पर दृश्यमान सुरक्षा उपस्थिति जरूरी है।
“मैंने अपनी आंखों से देखा कि रूट मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण इलाकों में कराए जा रहे हैं। ये मुख्य सड़कों पर किए जा रहे हैं जहां कोई लोग नहीं रहते, सिर्फ गाड़ियां गुजरती हैं।”- शिशिर बाजोरिया
एक अन्य BJP नेता ने राज्य पुलिस की भूमिका पर असंतोष जताते हुए कहा कि हिंसा-मुक्त और डर-मुक्त मतदान के लिए चुनाव आयोग को उन पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, जिन पर मतदाताओं को मतदान से रोकने के आरोप लगते हैं।
बैठक के बाद पार्टी ने फिर दोहराया कि लंबी, बहु-चरणीय चुनाव प्रक्रिया की बजाय कम समय में मतदान और नतीजों की दिशा तय होना राज्य के हित में है। BJP का तर्क है कि सात या आठ चरणों जैसे विस्तारित मॉडल की जरूरत नहीं है।
अब नजर चुनाव आयोग पर है, जो विभिन्न दलों से मिले इनपुट के आधार पर सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक तैयारियों का आकलन कर रहा है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कभी भी हो सकती है, और उसी के साथ यह स्पष्ट होगा कि आयोग चरणों की संख्या पर किस रुख के साथ आगे बढ़ता है।






