आंध्र प्रदेश के कुरनूल के पास भीषण बस अग्निकांड में 19 लोगों की मौत ने निजी अंतरराज्यीय बस परिवहन में मानवीय त्रुटि, कॉर्पोरेट लापरवाही और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की गंभीर समस्याओं को उजागर किया है। तेलंगाना के उत्पाद शुल्क मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव ने इस हादसे के लिए बस ड्राइवर और कावेरी ट्रैवल्स कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि ड्राइवर की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, क्योंकि उसने बाइक से टक्कर के बाद बस को रोकने के बजाय भागने की कोशिश की, जिससे चिंगारी उठी और आग भड़क गई।
मंत्री राव ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि ड्राइवर लक्ष्मैया ने टक्कर के बाद बस रोकी, आग की चिंगारी देखी, लेकिन यात्रियों को सुरक्षित निकालने या चेतावनी देने के बजाय वह भाग गया। उन्होंने कहा कि अगर ड्राइवर ने समय पर यात्रियों को सचेत किया होता, तो कई जिंदगियां बच सकती थीं। इसके अलावा, कावेरी ट्रैवल्स पर ड्राइवरों और कर्मचारियों को आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षण न देने का भी आरोप लगाया गया। राव ने कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने की बात कही, ताकि अन्य ट्रैवल कंपनियां सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
42 सीटों वाली बस को स्लीपर बस में बदला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बस को गैरकानूनी रूप से 42 सीटों वाली बस से स्लीपर बस में बदला गया था, जिससे गलियारे की जगह कम हो गई और आपातकालीन निकास मार्ग अवरुद्ध हो गए। बस में आग बुझाने के उपकरण और कांच तोड़ने के लिए मिनी-हथौड़े भी उपलब्ध नहीं थे। आग के तेजी से फैलने का कारण अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री जैसे एल-फोम, सीट कुशन और सिंथेटिक पर्दों का उपयोग था। इसके अलावा, बस का पंजीकरण भी संदिग्ध था, जो पहले दमन और दीव में और बाद में ओडिशा में कराया गया, ताकि स्थानीय करों और जांच से बचा जा सके।
आखिर किस तरह की लापरवाही हुई
इस त्रासदी के बाद, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सरकारों ने निजी बसों की फिटनेस, सुरक्षा और परमिट की तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। ड्राइवरों को आपातकालीन स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण, गैरकानूनी रूप से संशोधित वाहनों को जब्त करने और गैर-आग प्रतिरोधी सामग्री के उपयोग पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के परिवहन मंत्रियों ने सड़क सुरक्षा पर चर्चा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून बनाने की योजना बनाई है।






