देशभर में 31 मई तक बढ़ाया गया लॉकडाउन, जल्द जारी होंगी नई गाइडलाइन

देशभर में 31 मई तक बढ़ाया गया लॉकडाउन, जल्द जारी होंगी नई गाइडलाइन

नई दिल्ली| केंद्र सरकार ने देश में लागू लॉकडाउन को आगे बढ़ाते हुए 31 मई तक करने का फैसला किया है| लॉकडाउन के दो चरण पहले ही पूरे हो चुके हैं| रविवार को तीसरे चरण (lockdown 3.0) का भी आखिरी दिन है। सोमवार से लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू होगा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDMA ने केंद्र और राज्य सरकारों को चिट्‌ठी लिखकर इसे 14 दिन के लिए बढ़ाने को कहा। आज रात 9 बजे कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गाबा राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे। प्राधिकरण (NDMA) ने भारत सरकार के मंत्रालयों / विभागों, राज्य सरकारों और राज्य प्राधिकरणों को लॉकडाउन 31 मई 2020 तक जारी रखने का निर्देश दिया है। लॉकडाउन का चौथा चरण कैसा होगा, इसकी गाइडलाइन किसी भी वक्त जारी हो सकती है|

4 से 17 मई तक चालू लॉकडाउन 3.0 में कुछ छूट और रियायतें दी गईं थी| अब सबकी नजर नई गाइडलाइन पर है लॉकडाउन के चौथे चरण की औपचारिक घोषणा से पहले ही तीन राज्‍य पंजाब, महाराष्‍ट्र और तमिलनाडु अपने यहां 31 मई तक लॉकडाउन को बढ़ाने का फैसला ले चुके हैं।

बता दें कि कोरोना के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन की घोषणा की थी| तब ये लॉकडाउन 21 दिनों के लिए था| इसके बाद लॉकडाउन 2 की घोषणा की गई| इसकी मियाद 3 मई तक थी| इसके बाद फिर लॉकडाउन को 2 हफ्ते के लिए बढ़ा दिया गया| जो 17 मई तक चला|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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