कोलकाता में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके प्रस्तावित धरने के लिए पुलिस से अनुमति नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने मंगलवार को सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में ममता बनर्जी ने मंगलवार को धरना देने की घोषणा की थी, लेकिन कोलकाता पुलिस ने किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन की इजाजत देने से इनकार कर दिया। पुलिस की अनुमति न मिलने के बाद, ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों के बाद पहली बार कोलकाता की सड़कों पर उतरने का फैसला किया है। हालांकि, उन्हें सड़कों पर उतरने की इजाजत मिलेगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसी आशंका है कि पुलिस उन्हें उनके घर के बाहर ही रोक सकती है।
ममता बनर्जी ने पहले रानी रासमनी रोड पर धरने पर बैठने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह मंगलवार को सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक धर्मतला स्थित रानी रासमनी रोड पर धरने पर मौजूद रहेंगी। सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी व्यक्तिगत रूप से दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक इस धरने में शामिल होने वाली थीं। यह धरना अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था, जो पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देने का जरिया था।
हालांकि, पुलिस ने रानी रासमनी रोड पर प्रस्तावित इस धरने की अनुमति नहीं दी। मंगलवार को धरना शुरू होने से ठीक एक दिन पहले पुलिस की ओर से अनुमति न मिलने के बाद, ममता बनर्जी ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है, जहां सत्तारूढ़ दल की मुखिया को ही विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिल रही है। यह स्थिति राज्य में राजनीतिक टकराव बढ़ने का संकेत दे रही है।
धरना अनुमति विवाद पर पुराने आरोपों की फिर चर्चा
पूर्व में, ममता सरकार के कार्यकाल के दौरान, विपक्ष के नेता के तौर पर शुभेंदु अधिकारी को भी विभिन्न स्थानों पर धरना-प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उस समय भी आरोप लगे थे कि ममता की पुलिस उन्हें अक्सर इजाजत नहीं देती थी, जिसके चलते शुभेंदु अधिकारी को बार-बार न्यायालय का रुख करना पड़ता था। अब स्थिति कुछ वैसी ही दिख रही है, जब ममता बनर्जी को स्वयं पुलिस की अनुमति के लिए जूझना पड़ रहा है। यह घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे एक प्रकार का प्रतिशोध भी माना जा रहा है।
पुलिस ने नहीं दी रानी रासमनी रोड पर धरना देने की इजाजत
इस बार पुलिस ने रानी रासमनी रोड पर धरना देने की इजाजत नहीं दी है। इसके विकल्प के तौर पर पुलिस ने ‘Y’ चैनल पर बैठने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन वहां भी केवल 2 घंटे के लिए ही अनुमति देने की बात कही गई है। सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस ने शुरुआत में पुलिस के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद यह पहला अवसर होगा, जब ममता बनर्जी शुभेंदु अधिकारी की सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर कोई बड़ा प्रदर्शन करेंगी। यह प्रदर्शन आगामी राजनीतिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह पार्टी की एकजुटता और जनता के बीच उसकी पकड़ को दर्शाएगा।
TMC ने दो विधायकोंं को भी पार्टी से निकाला
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी से दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा, को निष्कासित कर दिया है। हाल ही में इन दोनों विधायकों ने पार्टी पर हस्ताक्षर की जालसाजी का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को फिर से सार्वजनिक किया था, जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने दोनों विधायकों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी पहले से ही बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी में जुटी है, जिससे आंतरिक कलह और भी उजागर हुई है और यह पार्टी के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर रहा है।





