रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) देशभर के सभी बैंकों को रेगुलेट करता है। जब भी कोई बैंक बैंकिंग संबंधित नियमों का उल्लंघन करता है, तो आरबीआई सख्त कदम उठाता है। किसी पर पेनल्टी, तो किसी पर प्रतिबंध लगायत है। मई में सेंट्रल बैंक ने 2 बैंकों का लाइसेंस रद्द कर दिया है। एक बैंक पर प्रतिबंध लगाया है, जो 6 महीने के लिए लागू होगा। आरबीआई स्थिति की नियमित समीक्षा करता रहेगा। वहीं 11 पर मौद्रिक जुर्माना लगाया गया है। हालांकि इसका असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा।
आरबीआई ने नगर सहकारी बैंक लिमिटेड इटावा की लिक्विडिटी स्थिति को देखते हुए 18 मई से कारोबार बंद करने का आदेश जारी किया है, जो 6 महीने तक लागू होगा। इस दौरान ग्राहकों को केवल खाते से 10,000 रुपये निकालने की अनुमति होगी। बैंक के स्थिति की समीक्षा भी नियमित तौर पर होगी। यदि कोई सुधार होता है, तो निर्देशों में बदलाव भी किया जाएगा।
इन बैंकों पर लगा जुर्माना
- द लुनावदा पीपल्स को-ऑपरेटिव बैंक, महिसागर, गुजरात
- श्री लक्ष्मी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, पुणे महाराष्ट्र
- द जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, राजस्थान
- जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, सिवनी, मध्यप्रदेश
- श्री कड़ी नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड, मेहसाणा गुजरात
- यस बैंक लिमिटेड
- हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक, मंडी
- यूथ डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, कोल्हापुर, महाराष्ट्र
- मोगावीरा को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई
- पंढरपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, महाराष्ट्र
- सिटी यूनियन बैंक
किन बैंकों पर मई में लगा ताला?
मुंबई में स्थित सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। 12 मई से बैंकिंग व्यवसाय बंद करने आदेश आरबीआई ने दिया था। द यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड फलतान महाराष्ट्र का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। इस बैंक को 19 मई से बैंकिंग बिजनेस को बंद करने का निर्देश दिया गया है। इन बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और कमाई की संभावनाएं नहीं है। इसकी स्थिति इतनी खराब है कि यह यह जमाकर्ताओं को पूरी राशि का भुगतान भी नहीं कर सकते। लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक को जमा स्वीकार और जमा की वापसी करने समय करने की अनुमति नहीं होगी।
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
जिन बैंक लाइसेंस रद्द हुआ या जिनपर प्रतिबंध लगाया, उनके जमाकर्ताओं के लिए सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी। DICGC अधिनियम 1961 के प्रावधानों के तहत हर जमाकर्ता डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन से अपनी जमा राशि पर 5 लाख रुपये की सीमा तक जमा बीमा दावा राशि पाने का हकदार होगा।






