
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर एक बड़ी साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने दावा किया कि एनआरसी को लागू करने की कोशिश राज्य में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का हिस्सा हो सकती है। ममता ने कहा कि उनकी सरकार किसी भी ऐसे कदम का विरोध करेगी जो बंगाल के लोगों के हितों के खिलाफ हो।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एनआरसी का मुद्दा लोगों को बांटने और भय का माहौल बनाने के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने असम में एनआरसी लागू करने के अनुभव का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि इससे लाखों लोग प्रभावित हुए और बंगाल में भी ऐसा ही खतरा है। ममता ने अपने समर्थकों से एकजुट रहने और इस मुद्दे पर सतर्क रहने को कहा।
2026 के चुनाव से पहले ध्रुवीकरण
ममता ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल 2026 के चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की रणनीति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने हमेशा सांप्रदायिक और विभाजनकारी ताकतों का विरोध किया है और इस बार भी वह ऐसा ही करेंगे। टीएमसी सरकार ने पहले भी नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और एनआरसी जैसे मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया है।
जमीनी स्तर पर मजबूत करने के निर्देश
आगामी चुनावों को देखते हुए ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से लोगों के बीच जाकर एनआरसी और ऐसी नीतियों के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने को कहा। ममता ने जोर देकर कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को कोई तोड़ नहीं सकता और उनकी सरकार हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करेगी।
