जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश की शासन व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि यह दोहरी प्रशासनिक प्रणाली सफलता के लिए नहीं, बल्कि असफलता के लिए बनाई गई है। स्वतंत्रता दिवस के अपने पहले भाषण में अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी पर सवाल उठाए और एक हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनकी उम्मीदें अब धूमिल होने लगी हैं, क्योंकि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बदलाव होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने उमर अब्दुल्ला के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि यह दोहरी शासन प्रणाली संरचनात्मक रूप से असफल है। तिवारी ने अपने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि एक केंद्र शासित प्रदेश के सांसद के रूप में जहां न तो विधानसभा है और न ही पूर्ण शासन व्यवस्था, यह मॉडल पूरी तरह से अव्यवहारिक है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यह शासन का मॉडल सफलता के लिए नहीं, बल्कि असफलता के लिए बनाया गया है।”
मौजूदा स्थिति स्वीकार नहीं
उमर अब्दुल्ला ने बख्शी स्टेडियम में अपने भाषण में कहा कि वह निराश्रित नहीं हैं और मौजूदा स्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने हाल के पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि क्या आतंकवादी हमले जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा तय करेंगे। उन्होंने कहा, “क्या पहलगाम के हत्यारे और पड़ोसी देश में उनके आका यह तय करेंगे कि हम राज्य बनेंगे या नहीं?”
राज्य का दर्जा बहाली की बात
अब्दुल्ला ने जोर देकर कहा कि हर बार जब राज्य का दर्जा बहाली की बात होती है, कुछ न कुछ बाधा उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने पूछा, “क्या यह उचित है? हमें उस अपराध के लिए क्यों दंडित किया जा रहा है, जिसमें हमारा कोई हाथ नहीं है?” उनकी यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को और मजबूती देती है।






