राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में इस बार मनुस्मृति के एक प्रसिद्ध श्लोक को शामिल किया गया है। इस मुद्दे ने शिक्षा और सामाजिक विमर्श के क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है। पुस्तक में इस श्लोक का उल्लेख वैदिक काल में महिलाओं के सम्मान और सामाजिक भूमिका को समझाने के संदर्भ में किया गया है।
इस अध्याय में बताया गया है कि वैदिक काल को अक्सर ऐसी अवधि के रूप में वर्णित किया जाता है जिसमें महिलाओं को समाज में उच्च और सम्मानजनक स्थान प्राप्त था। महिलाएं विद्वतापूर्ण शिक्षा प्राप्त करती थीं, पुरुषों के साथ कुछ अनुष्ठानों में भाग लेती थीं और सार्वजनिक सभाओं में शामिल होती थीं।
NCERT के सिलेबस में मनुस्मृति का श्लोक
एनसीईआरटी की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक “भारत और विश्व (India and the World)” राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुरूप तैयार किए गए नए पाठ्यक्रम का हिस्सा है। इसी क्रम में चालू सत्र से कक्षा 9 की कई पुस्तकों का स्वरूप और सामग्री बदली गई है। सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में ‘State and Society up to 1000 CE’ अध्याय शामिल किया है। इस अध्याय में वैदिक काल में महिलाओं की सम्मानजनक स्थिति को रेखांकित करने के लिए मनुस्मृति के एक प्रसिद्ध श्लोक का हवाला दिया गया है, साथ ही समय के साथ उनकी स्थिति में आए उतार-चढ़ाव का भी उल्लेख है।
इस श्लोक को शामिल किया गया
अध्याय में वैदिक काल को महिलाओं के लिए सम्मान और समानता की दृष्टि से एक उल्लेखनीय युग बताया गया है। उस समय महिलाओं को समाज में उच्च स्थान प्राप्त था। वे विद्वानों की तरह शिक्षा ग्रहण करती थीं, धार्मिक अनुष्ठानों में पुरुषों के साथ भाग लेती थीं, सार्वजनिक सभाओं में सक्रिय रूप से शामिल होती थीं तथा ऋग्वेद के अनेक सूक्तों की रचना महिला ऋषिकाओं जैसे अपाला, विश्ववारा, घोषा और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं को माना जाता है। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पुस्तक में मनुस्मृति (3.56) का श्लोक उद्धृत किया गया है:
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥”
अर्थात: जहां महिलाओं का सम्मान किया जाता है, वहां देवता निवास करते हैं। जहां उनका सम्मान नहीं किया जाता, वहां सभी धार्मिक क्रियाएं निष्फल हो जाती हैं।
वैदिक काल की व्यवस्थाओं का संदर्भ दिया
एनसीईआरटी की पुस्तक सिर्फ प्रशंसा तक सीमित नहीं है। श्लोक के बाद यह भी जोड़ा गया है कि भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति अपरिवर्तनीय नहीं रही। समय के साथ सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने से उनकी भूमिकाएं बदलीं, उनमें उतार-चढ़ाव आए, यहां तक कि गिरावट भी आई। फिर बाद के कालखंड में महिलाओं के योगदान के कई उदाहरण भी दिए गए हैं। ये अध्याय वर्ण व्यवस्था और जाति के विकास पर भी चर्चा करता है जिसमें बताया गया है कि प्रारंभिक वैदिक समाज में जन्म के आधार पर कठोर सामाजिक स्थिति नहीं थी बल्कि कर्म, व्यवसाय और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर था।
एनसीईआरटी के पाठ्यप्रम मं मनुस्मृति का उल्लेख ऐसे समय आया है, जब कुछ समय पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय में मनुस्मृति को वैकल्पिक पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव विवाद का विषय बन गया था। व्यापक विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस प्रस्ताव को लागू नहीं किया था। ऐसे में अब स्कूल स्तर की NCERT पुस्तक में इसका संदर्भ शामिल होने से इस विषय पर फिर बहस शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।






