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रूस और वेनेजुएला से तेल आयात पर विदेश मंत्रालय ने नीति स्पष्ट की, कहा- 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं होगा

Written by:Banshika Sharma
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भारत सरकार ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता के बीच अपनी ऊर्जा नीति को लेकर एक बार फिर अपना रुख साफ कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा देश की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी के तहत रूस और वेनेजुएला जैसे देशों से तेल आयात पर फैसले लिए जाते हैं।
रूस और वेनेजुएला से तेल आयात पर विदेश मंत्रालय ने नीति स्पष्ट की, कहा- 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं होगा

नई दिल्ली: वैश्विक मंच पर रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चल रही बहस के बीच भारत ने दृढ़ता से अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार ने कहा है कि देश के 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसे किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय (MEA) ने यह बयान रूस से तेल आयात से जुड़े सवालों पर दिया।

मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की ऊर्जा नीति स्वतंत्र और संतुलित है, जो राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखती है। यह नीति किसी एक देश पर निर्भरता के बजाय ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने पर केंद्रित है।

ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सरकार की रणनीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत के सभी फैसले इसी सिद्धांत को ध्यान में रखकर लिए गए हैं और भविष्य में भी लिए जाएंगे।

“भारत की ऊर्जा सुरक्षा 1.4 अरब लोगों की जरूरतों पर आधारित है। सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना हमारी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ऑब्जेक्टिव मार्केट की स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल के हिसाब से अपने एनर्जी सोर्स को डाइवर्सिफाई करना इसे सुनिश्चित करने की हमारी रणनीति का मुख्य हिस्सा है।”- रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय

आंकड़े बताते हैं कि भारत की यह रणनीति कारगर साबित हुई है। साल 2022 के बाद से रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है, जो देश के कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है। इससे पहले भारत अपनी जरूरतों के लिए मुख्य रूप से सऊदी अरब और इराक जैसे मध्य पूर्वी देशों पर निर्भर था।

वेनेजुएला के साथ व्यापार पर भी खुली हैं संभावनाएं

सिर्फ रूस ही नहीं, भारत अन्य विकल्पों पर भी विचार करने के लिए तैयार है। वेनेजुएला के संदर्भ में जायसवाल ने कहा, “जहां तक वेनेजुएला की बात है, यह ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापार और निवेश दोनों तरफ से हमारा लंबे समय से पार्टनर रहा है।”

उन्होंने बताया कि भारत 2019-20 तक वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात कर रहा था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसे रोकना पड़ा। 2023-24 में आयात फिर से शुरू हुआ, लेकिन प्रतिबंध दोबारा लगने पर इसे फिर से रोकना पड़ा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया, “ऊर्जा सुरक्षा के प्रति हमारे नजरिए के मुताबिक, भारत वेनेजुएला सहित किसी भी कच्चे तेल की सप्लाई के कमर्शियल फायदों को देखने के लिए तैयार है।” यह बयान साफ करता है कि भारत अपने नागरिकों के हित में किसी भी देश से व्यावसायिक लाभ के आधार पर व्यापार करने का विकल्प खुला रखेगा।