अटल पेंशन योजना को लेकर ताजा अपडेट है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (21 जनवरी 2026) को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। इस विस्तार के साथ ही योजना के प्रचार, विकासात्मक गतिविधियों और ‘गैप फंडिंग’ के लिए वित्तीय सहायता को भी स्वीकृति मिली है। इस फैसले से लाखों निम्न-आय वर्ग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लाभ मिलेगा।
कार्यान्वयन रणनीति और प्रमुख प्रभाव
कैबिनेट बैठक में बताया गया कि इस योजना के माध्यम से सरकार असंगठित श्रमिकों के बीच पहुंच बढ़ाने के लिए प्रचार और विकासात्मक गतिविधियां, जिनमें जागरूकता और क्षमता निर्माण शामिल हैं, की सहायता करेगी। योजना की व्यवहार्यता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने और उसकी स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक धनराशि का आवंटन के लिए भी सहायता करेगी। यह योजना लाखों निम्न-आय वर्ग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था आय सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती है और भारत के पेंशन-आधारित समाज में परिवर्तन का समर्थन करती है। सरकार का मानना है कि योजना को आगे बढ़ाने से ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी
अटल पेंशन योजना पर एक नजर
मोदी सरकार द्वारा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था आय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एपीवाई को 9 मई, 2015 को शुरू किया गया था। एपीवाई 60 वर्ष की आयु से शुरू होकर, अंशदान के आधार पर, प्रति माह 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की गारंटीकृत न्यूनतम पेंशन प्रदान करता है। 19 जनवरी, 2026 तक, 8.66 करोड़ से अधिक ग्राहक नामांकित हो चुके हैं।





