प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम समझौते में मध्यस्थता करने की बात कही थी। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश ने भारत को पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए नहीं कहा। उन्होंने कहा, “विश्व का कोई भी नेता नहीं था जिसने भारत से सैन्य कार्रवाई रोकने को कहा।”
पीएम मोदी ने बताया कि 9 मई की रात को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन वह सेना के साथ बैठक में व्यस्त थे। बाद में जब उन्होंने वेंस को कॉल वापस किया तो वेंस ने बताया कि पाकिस्तान एक बड़े हमले की योजना बना रहा है। इस पर मोदी ने जवाब दिया, “अगर पाकिस्तान की यह मंशा है तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हम गोली का जवाब गोले से देंगे।”
22 मिनट के भीतर बदला लिया
प्रधानमंत्री ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने 22 मिनट के भीतर उसका बदला ले लिया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान कुछ नहीं कर सका। हमारे सशस्त्र बलों ने 22 अप्रैल के हमले का 22 मिनट में सटीक हमलों के साथ बदला लिया।” मोदी ने सशस्त्र बलों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पहली बार अभेद्य ठिकानों को नष्ट किया।
भारत ने सैन्य ताकत दिखाई
पीएम मोदी का यह बयान न केवल भारत की सैन्य ताकत और स्वतंत्र विदेश नीति को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत किसी भी बाहरी दबाव के सामने नहीं झुकेगा। ट्रंप के मध्यस्थता के दावे को खारिज करके मोदी ने यह संदेश दिया कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में तीसरे पक्ष की भूमिका सीमित है। यह बयान घरेलू स्तर पर राष्ट्रवादी भावनाओं को मजबूत करने और विपक्ष को यह दिखाने का प्रयास हो सकता है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर दृढ़ है।





