मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह बेहद खास है। यहां मौजूद चीतों को अब पहली बार दूसरे राज्य यानी गुजरात भेजा जाएगा। योजना के तहत कूनो से 4 चीते कच्छ के बन्नी ग्रासलैंड में शिफ्ट किए जाएंगे, जिसमें 2 नर और 2 मादा चीते शामिल होंगे। यह भारत में चीता प्रोजेक्ट के तहत पहली अंतरराज्यीय शिफ्टिंग होगी, जिसे वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कूनो चीता प्रोजेक्ट का विस्तार अब गुजरात तक
अब तक कूनो नेशनल पार्क ही भारत में चीतों का मुख्य केंद्र रहा है, लेकिन अब इस प्रोजेक्ट का दायरा बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और चीता प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब कूनो और गांधीसागर के बाद गुजरात के कच्छ को भी चीता पुनर्वास क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे साफ है कि सरकार इस प्रोजेक्ट को सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे देशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाने की योजना है।
कच्छ का बन्नी ग्रासलैंड क्यों चुना गया?
गुजरात के कच्छ में स्थित बन्नी ग्रासलैंड को चीतों के लिए बेहद उपयुक्त माना जा रहा है। यहां का विशाल खुला क्षेत्र, घास के मैदान और प्राकृतिक वातावरण अफ्रीका के सवाना की तरह है, जहां चीते आसानी से शिकार कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलाका चीतों की गति और जीवनशैली के लिए अनुकूल है, इसी कारण NTCA ने कई बार इस क्षेत्र का निरीक्षण भी किया है। यहां 600 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष बाड़ा तैयार किया जा रहा है, जिसमें सॉफ्ट-रिलीज जोन, क्वारंटाइन सुविधा और ट्रैकिंग सिस्टम शामिल होगा।
मध्य प्रदेश में कितने चीते और आगे की योजना
फिलहाल मध्य प्रदेश के कूनो और गांधीसागर क्षेत्र में कुल 53 चीते मौजूद हैं। इनमें से 50 चीते कूनो में और 3 गांधीसागर में विचरण कर रहे हैं। एक चीता राजस्थान सीमा तक भी पहुंच चुका है। इससे साफ है कि चीतों की संख्या और उनका दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब सरकार की योजना है कि इन्हें सिर्फ एक जगह तक सीमित न रखा जाए, बल्कि अन्य राज्यों में भी सुरक्षित प्राकृतिक आवास तैयार कर उनका पुनर्वास किया जाए। इसी कड़ी में नौरादेही अभयारण्य को भी तीसरे चीता घर के रूप में विकसित किया जा रहा है, हालांकि फिलहाल इस योजना पर रोक है।
क्या होगा चीता ट्रांसफर का असर और इसका महत्व
कूनो से गुजरात चीता ट्रांसफर सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह भारत में वन्यजीव संरक्षण की नई दिशा भी तय करता है। इससे चीतों के लिए नए और बड़े प्राकृतिक क्षेत्र विकसित होंगे, जिससे उनकी आबादी बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों में चीता प्रोजेक्ट फैलने से पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो भारत में चीतों की वापसी एक स्थायी और मजबूत योजना बन सकती है।






