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भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई न होने से हताश कांग्रेस नेता छोड़ेंगे भारतीय नागरिकता, जानिए क्या है पूरा मामला?

Reported by:Kamlesh Sarda|Edited by:Banshika Sharma
Published:
नीमच में भ्रष्टाचार के खिलाफ अनोखा विरोध देखने को मिलेगा। दरअसल कांग्रेस नेता पंकज तिवारी भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई न होने से अपनी भारतीय नागरिकता और मतदाता अधिकार से इस्तीफा देंगे। जानिए आखिर क्या है यह पूरा मामला?
भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई न होने से हताश कांग्रेस नेता छोड़ेंगे भारतीय नागरिकता, जानिए क्या है पूरा मामला?

नीमच जिले में आज एक अनोखा विरोध प्रदर्शन होने जा रहा है। दरअसल प्रशासन की कार्यप्रणाली से हताश एक कांग्रेस कार्यकर्ता पंकज तिवारी अपनी भारतीय नागरिकता और मतदाता अधिकार से इस्तीफा देने वाले हैं। यह कदम संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत एक अभूतपूर्व सांकेतिक विरोध के रूप में उठाया गया है। यह विरोध प्रशासन के उस रवैये के खिलाफ है जहां रंगे हाथों पकड़े गए भ्रष्टाचारियों पर सालों से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

दरअसल इस पूरे मामले को कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने भी उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे लेकर लगातार पोस्ट किए हैं। वहीं पंकज तिवारी का यह आक्रोश मुख्य रूप से जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार और उस पर प्रशासनिक चुप्पी को लेकर है। उनका आरोप है कि थड़ोद पंचायत के सरपंच-सचिव और जनपद अध्यक्ष गोपाल चारण ने सरकारी राशि का गबन किया है। इन सभी को लोकायुक्त द्वारा रंगे हाथों पकड़ा गया था। प्रमाणित भ्रष्टाचार के बावजूद इन्हें अभी तक पद से नहीं हटाया गया है। यह मामला ढाई साल से अधिक समय से लंबित है।

नीमच जिले में आज एक अनोखा विरोध प्रदर्शन होने जा रहा है। दरअसल प्रशासन की कार्यप्रणाली से हताश एक कांग्रेस कार्यकर्ता पंकज तिवारी अपनी भारतीय नागरिकता और मतदाता अधिकार से इस्तीफा देने वाले हैं। यह कदम संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत एक अभूतपूर्व सांकेतिक विरोध के रूप में उठाया गया है। यह विरोध प्रशासन के उस रवैये के खिलाफ है जहां रंगे हाथों पकड़े गए भ्रष्टाचारियों पर सालों से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

दरअसल इस पूरे मामले को कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने भी उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे लेकर लगातार पोस्ट किए हैं। वहीं पंकज तिवारी का यह आक्रोश मुख्य रूप से जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार और उस पर प्रशासनिक चुप्पी को लेकर है। उनका आरोप है कि थड़ोद पंचायत के सरपंच-सचिव और जनपद अध्यक्ष गोपाल चारण ने सरकारी राशि का गबन किया है। इन सभी को लोकायुक्त द्वारा रंगे हाथों पकड़ा गया था। प्रमाणित भ्रष्टाचार के बावजूद इन्हें अभी तक पद से नहीं हटाया गया है। यह मामला ढाई साल से अधिक समय से लंबित है।

क्या है पंकज तिवारी की मांग?

दरअसल पंकज तिवारी का सीधा सवाल प्रशासन से है। वे पूछते हैं कि अगर यह 'जन की सुनवाई' है, तो सरकारी राशि का गबन करने वालों पर एफआईआर दर्ज होने में ढाई साल का समय क्यों लग रहा है। इस लंबी देरी पर वे प्रशासन की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। इस सांकेतिक विरोध के तहत पंकज तिवारी ने एक पोस्टर और 'नागरिकता हस्तांतरण प्रमाण-पत्र' जारी किया है। इसमें प्रशासन पर तीखा तंज कसा गया है। उन्होंने प्रशासन के सामने दो टूक मांग रखी है। पहली मांग है कि उनकी नागरिकता का इस्तीफा मंजूर किया जाए। उन्होंने अपनी नागरिकता और मताधिकार नीमच कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के नाम ट्रांसफर करने की व्यंग्यात्मक पेशकश की है। दूसरी मांग है कि भ्रष्टाचारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। दोषी जनपद अध्यक्ष और सरपंच-सचिव को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

नागरिकता का इस्तीफा मंजूर करो, या भ्रष्टाचारियों को हटाओ: पंकज तिवारी

पंकज तिवारी ने कहा है कि 'रंगे हाथों पकड़े चोर को सजा नहीं, कुर्सी और सम्मान मिलता है!' उन्होंने आगे कहा, 'कलेक्टर साहब, या तो मेरी नागरिकता का इस्तीफा मंजूर करो, या भ्रष्टाचारियों को हटाओ। दोनों नागरिक एक साथ नहीं रह सकते।' यह कथन प्रशासन की निष्क्रियता पर उनकी गहरी निराशा को दर्शाता है।

वहीं इस अनोखे प्रदर्शन ने केवल नीमच ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के 'जनसुनवाई' मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पंकज तिवारी का यह कदम इस बात को उजागर करता है कि आम जनता का विश्वास शासन-व्यवस्था से उठ रहा है। उनका कहना है कि कानून मानना अब सिर्फ आम जनता की ड्यूटी रह गई है, प्रशासन और अफसरों की नहीं। यह स्थिति आम नागरिकों में व्याप्त असंतोष का प्रतीक है।

यह आवेदन आज सिंगोली तहसील की जनसुनवाई में प्रस्तुत किया जाएगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिम्मेदार प्रशासन इस 'गांधीवादी' विरोध का क्या जवाब देता है। क्या इसके बाद जिले के भ्रष्ट अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

क्या है पंकज तिवारी की मांग?

नीमच जिले में आज एक अनोखा विरोध प्रदर्शन होने जा रहा है। दरअसल प्रशासन की कार्यप्रणाली से हताश एक कांग्रेस कार्यकर्ता पंकज तिवारी अपनी भारतीय नागरिकता और मतदाता अधिकार से इस्तीफा देने वाले हैं। यह कदम संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत एक अभूतपूर्व सांकेतिक विरोध के रूप में उठाया गया है। यह विरोध प्रशासन के उस रवैये के खिलाफ है जहां रंगे हाथों पकड़े गए भ्रष्टाचारियों पर सालों से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

दरअसल इस पूरे मामले को कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने भी उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे लेकर लगातार पोस्ट किए हैं। वहीं पंकज तिवारी का यह आक्रोश मुख्य रूप से जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार और उस पर प्रशासनिक चुप्पी को लेकर है। उनका आरोप है कि थड़ोद पंचायत के सरपंच-सचिव और जनपद अध्यक्ष गोपाल चारण ने सरकारी राशि का गबन किया है। इन सभी को लोकायुक्त द्वारा रंगे हाथों पकड़ा गया था। प्रमाणित भ्रष्टाचार के बावजूद इन्हें अभी तक पद से नहीं हटाया गया है। यह मामला ढाई साल से अधिक समय से लंबित है।

क्या है पंकज तिवारी की मांग?

दरअसल पंकज तिवारी का सीधा सवाल प्रशासन से है। वे पूछते हैं कि अगर यह 'जन की सुनवाई' है, तो सरकारी राशि का गबन करने वालों पर एफआईआर दर्ज होने में ढाई साल का समय क्यों लग रहा है। इस लंबी देरी पर वे प्रशासन की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। इस सांकेतिक विरोध के तहत पंकज तिवारी ने एक पोस्टर और 'नागरिकता हस्तांतरण प्रमाण-पत्र' जारी किया है। इसमें प्रशासन पर तीखा तंज कसा गया है। उन्होंने प्रशासन के सामने दो टूक मांग रखी है। पहली मांग है कि उनकी नागरिकता का इस्तीफा मंजूर किया जाए। उन्होंने अपनी नागरिकता और मताधिकार नीमच कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के नाम ट्रांसफर करने की व्यंग्यात्मक पेशकश की है। दूसरी मांग है कि भ्रष्टाचारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। दोषी जनपद अध्यक्ष और सरपंच-सचिव को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

नागरिकता का इस्तीफा मंजूर करो, या भ्रष्टाचारियों को हटाओ: पंकज तिवारी

पंकज तिवारी ने कहा है कि 'रंगे हाथों पकड़े चोर को सजा नहीं, कुर्सी और सम्मान मिलता है!' उन्होंने आगे कहा, 'कलेक्टर साहब, या तो मेरी नागरिकता का इस्तीफा मंजूर करो, या भ्रष्टाचारियों को हटाओ। दोनों नागरिक एक साथ नहीं रह सकते।' यह कथन प्रशासन की निष्क्रियता पर उनकी गहरी निराशा को दर्शाता है।

वहीं इस अनोखे प्रदर्शन ने केवल नीमच ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के 'जनसुनवाई' मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पंकज तिवारी का यह कदम इस बात को उजागर करता है कि आम जनता का विश्वास शासन-व्यवस्था से उठ रहा है। उनका कहना है कि कानून मानना अब सिर्फ आम जनता की ड्यूटी रह गई है, प्रशासन और अफसरों की नहीं। यह स्थिति आम नागरिकों में व्याप्त असंतोष का प्रतीक है।

यह आवेदन आज सिंगोली तहसील की जनसुनवाई में प्रस्तुत किया जाएगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिम्मेदार प्रशासन इस 'गांधीवादी' विरोध का क्या जवाब देता है। क्या इसके बाद जिले के भ्रष्ट अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

दरअसल पंकज तिवारी का सीधा सवाल प्रशासन से है। वे पूछते हैं कि अगर यह ‘जन की सुनवाई’ है, तो सरकारी राशि का गबन करने वालों पर एफआईआर दर्ज होने में ढाई साल का समय क्यों लग रहा है। इस लंबी देरी पर वे प्रशासन की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। इस सांकेतिक विरोध के तहत पंकज तिवारी ने एक पोस्टर और ‘नागरिकता हस्तांतरण प्रमाण-पत्र’ जारी किया है। इसमें प्रशासन पर तीखा तंज कसा गया है। उन्होंने प्रशासन के सामने दो टूक मांग रखी है। पहली मांग है कि उनकी नागरिकता का इस्तीफा मंजूर किया जाए। उन्होंने अपनी नागरिकता और मताधिकार नीमच कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के नाम ट्रांसफर करने की व्यंग्यात्मक पेशकश की है। दूसरी मांग है कि भ्रष्टाचारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। दोषी जनपद अध्यक्ष और सरपंच-सचिव को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

नागरिकता का इस्तीफा मंजूर करो, या भ्रष्टाचारियों को हटाओ: पंकज तिवारी

पंकज तिवारी ने कहा है कि ‘रंगे हाथों पकड़े चोर को सजा नहीं, कुर्सी और सम्मान मिलता है!’ उन्होंने आगे कहा, ‘कलेक्टर साहब, या तो मेरी नागरिकता का इस्तीफा मंजूर करो, या भ्रष्टाचारियों को हटाओ। दोनों नागरिक एक साथ नहीं रह सकते।’ यह कथन प्रशासन की निष्क्रियता पर उनकी गहरी निराशा को दर्शाता है।

वहीं इस अनोखे प्रदर्शन ने केवल नीमच ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के ‘जनसुनवाई’ मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पंकज तिवारी का यह कदम इस बात को उजागर करता है कि आम जनता का विश्वास शासन-व्यवस्था से उठ रहा है। उनका कहना है कि कानून मानना अब सिर्फ आम जनता की ड्यूटी रह गई है, प्रशासन और अफसरों की नहीं। यह स्थिति आम नागरिकों में व्याप्त असंतोष का प्रतीक है।

यह आवेदन आज सिंगोली तहसील की जनसुनवाई में प्रस्तुत किया जाएगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिम्मेदार प्रशासन इस ‘गांधीवादी’ विरोध का क्या जवाब देता है। क्या इसके बाद जिले के भ्रष्ट अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

नीमच से कमलेश सारडा की रिपोर्ट

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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