नीमच के सिंगोली नगर परिषद में पिछले कुछ दिनों से राजीव आवास योजना भूखंड घोटाले का मामला लगातार गरमाया हुआ है। अब इस मामले में प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाया गया है। बता दें कि एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ द्वारा इस खबर को प्रमुखता से उजागर किया गया था। खबर सामने आने के बाद जनता के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला। जिसके चलते प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करते हुए देखा गया।
हमारे नीमच संवाददाता कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट के मुताबिक जनता के बीच फैले आक्रोश को देखते हुए जावद एसडीएम प्रीति संघवी ने मामले में सीधा हस्तक्षेप किया। उनका कड़ा रवैया देखते हुए जांच के बाद नगर परिषद बैकफुट पर आया और विवादित प्लॉट आवंटन को निरस्त कर दिया गया।
MP Breaking की खबर का असर
खबर प्रकाशित होने के बाद कुंभकरण की नींद में सोया प्रशासन जागा। इसके बाद जावद एसडीएम प्रीति संघवी ने खुद सिंगोली पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना किया। स्थिति का जायजा लेने और तथ्यों की जांच करने के बाद उन्होंने विवादित प्लॉट के आवंटन को निरस्त करने की अनुशंसा की। ठोस साक्ष्यों के आधार पर और प्रशासन के दबाव के बाद नगर परिषद ने इन भूखंडों के आवंटन को आधिकारिक तौर पर निरस्त कर दिया है।

क्या है मामला
ये मामला सिंगोली नगर परिषद में वार्ड नंबर 3 स्थित राजीव आवास योजना में नगर पंचायत द्वारा बनाए गए सार्वजनिक गार्डन को नष्ट कर वहां भूखंड घोटाला करने का है। इस मामले में नगर परिषद अध्यक्ष पर आरोप लगाया गया था कि गार्डन को ध्वस्त करने के बाद वहां प्लॉट काटकर उनकी नीलामी कर घोटाला करने की योजना बनाई गई थी। इसके अलावा सबूत मिटाने की कोशिश के आरोप भी लगाए गए थे। यह बताया गया था कि असामाजिक तत्वों के माध्यम से बगीचे की बाउंड्रीवॉल तुड़वा दी गई और लोहे की जालियां चोरी करवा दी थी। कोई सबूत ना बचे इसलिए हरे पेड़ों को काटकर अलग कर दिया गया।
कुर्सी पर चस्पा ज्ञापन
जब ये मनमानी सामने आई तो ब्लॉक कांग्रेस, नगर कांग्रेस संगठन, भूखंडधारी और आम नागरिक शिकायत लेकर नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे। यहां कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। घंटों तक इंतजार करने के बाद आक्रोशित कांग्रेस नेताओं ने नगर पालिका अधिकारी की खाली कुर्सी पर अपना ज्ञापन चस्पा किया। इस मामले में कांग्रेस नेता पंकज तिवारी ने कहा था कि अधिकारी तो गायब है, सीएमओ साहब जब आएंगे तो अपनी कुर्सी से ज्ञापन प्राप्त कर लेंगे। उन्होंने प्रशासन के दोहरे रवैया पर तीखा प्रहार करते हुए क्रांति की चेतावनी भी दी थी। स्पष्ट तौर पर यह कहा गया था कि अगर कोई आम नागरिक सरकारी दीवार तोड़ता तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती। हमारी मांग है कि इस नुकसान की भरपाई जनता के टैक्स के पैसे से नहीं बल्कि जिम्मेदार अध्यक्ष और सीएमओ की जेब से की जाए। प्रशासन कान खोल कर सुन ले, अब जावद में सिर्फ क्रांति होगी।
जनता को मिली जीत
इस मामले में जब नगर पंचायत में नागरिकों की सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने तहसीलदार और पुलिस थाना प्रभारी को नामजद FIR के लिए आवेदन दिया। इसके बाद एसडीएम प्रीति संघवी ने आश्वासन दिया की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। अब आवंटन निरस्त कर दिया गया है, जिससे आम जनता को राहत की सांस मिली है। ये जनता द्वारा किए गए विरोध की बड़ी जीत है।







