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धार भोजशाला को लेकर MP हाईकोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में दूसरी SLP दाखिल

Written by:Shruty Kushwaha
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मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश उनके धार्मिक अधिकारों को प्रभावित करता है और यह ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है जहां इसकी सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
धार भोजशाला को लेकर MP हाईकोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में दूसरी SLP दाखिल

धार भोजशाला को लेकर एक नया मोड़ आ गया है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर आए हाईकोर्ट के फैसले के विरुद्ध मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की गई है। यह याचिका मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटीद्वारा 25 मई को दायर की गई है।

इससे पहले 21 मई को भी काज़ी मोइनुद्दीन की ओर से भी एक अलग SLP दाखिल की जा चुकी है, जिस पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई है। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि हाईकोर्ट का फैसला ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ की मूल भावना के विपरीत है और इससे उनके धार्मिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की विशेष अनुमति याचिका

धार भोजशाला मामले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से 25 मई को न्यायालय में एसएलपी दाखिल की गई है।

बता दें कि 15 मई को हाईकोर्ट की इंदौर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि भोजशाला परिसर ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर माता सरस्वती का मंदिर है। कोर्ट ने ASI सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए हिंदू पक्ष को परिसर में पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया और वर्ष 2003 में लागू उस व्यवस्था को रद्द कर दिया था जिसके तहत शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट आदेश के बाद 22 मई को पहले शुक्रवार पर भोजशाला परिसर में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा महाआरती और पूजा-अर्चना की गई।

सीएम ने की ये घोषणाएं

वहीं, 25 मई को धार दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना की और कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि भोजशाला को विकसित कर यहां भव्य “सरस्वती लोक” बनाया जाएगा, जो सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा। इसके साथ ही उन्होंने राजा भोज के नाम पर एक अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान स्थापित करने की भी घोषणा की।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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