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दीपिका के 8 घंटे शिफ्ट विवाद पर सबा आजाद का बयान, कहा– महिलाओं से इतनी उम्मीदें क्यों?

Written by:Bhawna Choubey
Published:
दीपिका पादुकोण की 8 घंटे शिफ्ट डिमांड पर छिड़ी बहस के बीच सबा आजाद ने महिलाओं की स्थिति और इंडस्ट्री के जेंडर गैप पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज भी महिलाओं से असमान उम्मीदें और जिम्मेदारियां जुड़ी हुई हैं।
दीपिका के 8 घंटे शिफ्ट विवाद पर सबा आजाद का बयान, कहा– महिलाओं से इतनी उम्मीदें क्यों?

बॉलीवुड में हाल ही में दीपिका पादुकोण की 8 घंटे शिफ्ट की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। यह मुद्दा सिर्फ काम के घंटों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति, बराबरी और कार्य संस्कृति पर बड़ी बहस छेड़ दी है। इसी बीच सबा आजाद का बयान सामने आया है, जिसने इस चर्चा को और तेज कर दिया है।

सबा आजाद ने उठाए महिलाओं से जुड़ी उम्मीदों पर सवाल

सबा आजाद ने साफ कहा कि महिलाओं से समाज और इंडस्ट्री दोनों जगह बहुत ज्यादा उम्मीदें रखी जाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी महिला से यह क्यों अपेक्षा की जाती है कि वह बच्चे के जन्म के तुरंत बाद भी लंबे समय तक काम करे, जबकि पुरुषों के लिए ऐसे नियम नहीं होते।

उनका कहना है कि महिलाओं को आज भी दोहरी जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ता है, एक तरफ काम और दूसरी तरफ घर। यह असमानता आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, चाहे बदलाव धीरे-धीरे हो रहे हों।

बॉलीवुड और जेंडर गैप पर सबा आजाद का बड़ा बयान

सबा आजाद ने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में भले ही सुधार हुए हों, लेकिन जेंडर पे गैप और व्यवहार में फर्क अभी भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अक्सर उनकी सीमाएं तय करके रख दी जाती हैं, जबकि पुरुषों के साथ ऐसा नहीं होता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म ने महिलाओं के लिए नए अवसर खोले हैं, लेकिन अभी भी बराबरी का सफर पूरा नहीं हुआ है। फिल्मों और कंटेंट की दुनिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन सोच बदलने में समय लग रहा है।

दीपिका पादुकोण 8 घंटे शिफ्ट डिमांड पर बढ़ी बहस

दीपिका पादुकोण की 8 घंटे शिफ्ट की मांग को कई लोगों ने सपोर्ट किया, तो कुछ ने इसे अस्वीकार भी किया। इस मुद्दे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कामकाजी महिलाओं के लिए इंडस्ट्री में बेहतर और संतुलित माहौल होना चाहिए या नहीं। सबा आजाद के बयान ने इस बहस को एक नया नजरिया दिया है, जिसमें सिर्फ काम के घंटे नहीं बल्कि सामाजिक सोच और बराबरी पर भी चर्चा हो रही है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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