राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले पर अपनी गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, सिब्बल ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया कि सरकार के मंत्री इस तरह के गंभीर मामले को केवल एक ‘रूटीन मैटर’ या ‘गलती’ के रूप में देखते हैं, जो कि अत्यंत चिंताजनक है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने देश में व्यापक स्तर पर फैल चुकी लीकेज की समस्या को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘वोटर लिस्ट से लेकर एग्जाम तक’ हर जगह तो लीक है। उन्होंने सीधे तौर पर यह सवाल उठाया कि इन लगातार हो रहे पेपर लीक्स का आखिर जिम्मेदार कौन है। सिब्बल ने व्यंग्यपूर्ण लहजे में कहा कि हिंदुस्तान ‘विकसित भारत’ की ओर तो बढ़ रहा है, लेकिन ‘शिक्षित भारत’ है नहीं। उन्होंने शिक्षा के मौजूदा तरीके और इस प्रकार की घटनाओं के बार-बार होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
पेपर लीक समस्या दशकों से जारी: सिब्बल
यह आज की बात नहीं है, इस पर जोर देते हुए राज्यसभा सदस्य ने बताया कि पेपर लीक की समस्या दशकों से चली आ रही है। उन्होंने वर्ष 2016, 2021, 2024 और अब 2026 में भी पेपर लीक के मामलों का उल्लेख किया, जो यह दर्शाता है कि यह एक प्रणालीगत विफलता है। सिब्बल ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ ‘मन की बात’ में पेपर लीक के कारणों और समाधान पर चर्चा करें, न कि केवल अन्य विषयों पर। उन्होंने प्रश्न किया कि जो लीक पेपर पकड़े गए, उनका क्या हुआ, और जहां नहीं पकड़े गए उनका क्या? उन्होंने व्यापम घोटाले का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या उसमें किसी का इस्तीफा लिया गया था और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यदि शिक्षा मंत्री नहीं लेंगे।
नीट के अलावा अन्य परीक्षाओं में भी व्यापक पेपर लीक
सिब्बल ने नीट के अलावा अन्य परीक्षाओं में भी व्यापक पैमाने पर पेपर लीक होने की बात कही। उन्होंने बताया कि अकेले 2019 में देश भर में 65 से 70 एग्जाम के पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने इस पर किसी भी तरह की चर्चा न होने पर आश्चर्य व्यक्त किया और इसे एक ‘ट्रेंड’ करार दिया कि इम्तिहान के साथ लीक होना तय है। एक महत्वपूर्ण अवलोकन करते हुए, उन्होंने बताया कि पेपर लीक के अधिकतर मामले बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और उत्तराखंड जैसे भाजपा शासित राज्यों में हुए हैं। सिब्बल ने सवाल किया कि क्या छात्रों के प्रति इन सरकारों की कोई ‘खास दिलचस्पी’ है, जो ऐसे मामले बार-बार सामने आते हैं।
इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी और तुरंत सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए थी। उन्होंने इस मामले में हुई देरी पर भी सवाल उठाया। सिब्बल ने छात्रों के सालों साल की मेहनत और गरीब बच्चों के भविष्य पर इसके गंभीर प्रभाव को उजागर किया। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जिस सरकार के शासन में यह हो रहा है, वहां के शिक्षा मंत्रियों को ‘सजा के तौर पर’ इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार में किसी के इस्तीफा न देने की आशंका भी व्यक्त की, जो कि एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है। अंत में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो शासन-प्रशासन ठीक से इम्तिहान नहीं करा सकता, वह देश क्या चलाएगा, यह एक बड़ा प्रश्न है।
My Press Conference on yet another leak of the NEET Examination.
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— Kapil Sibal (@KapilSibal) May 12, 2026






