केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत और अमेरिका के बीच अच्छे संबंध बरकरार हैं और इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है। गोयल ने कहा कि दोनों देश जल्द ही एक निष्पक्ष और संतुलित समझौते पर पहुंच जाएंगे। उन्होंने एएनआई को दिए साक्षात्कार में कहा, “हमें धैर्य के साथ बातचीत को आगे बढ़ाना चाहिए, क्योंकि यह दीर्घकालिक हितों के लिए है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से निर्यात होने वाली वस्तुओं पर पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। यह कदम भारत द्वारा रूसी तेल के आयात को जारी रखने के जवाब में उठाया गया। यह बढ़ा हुआ टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो चुका है और यह उन सभी भारतीय उत्पादों पर लागू है, जो अमेरिका में खपत के लिए प्रवेश करते हैं या गोदामों से निकाले जाते हैं।
जीएसटी सुधारों का संबंध नहीं
पीयूष गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि टैरिफ के साथ-साथ घोषित जीएसटी सुधारों का इस मुद्दे से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधारों पर कई महीनों से काम चल रहा था और यह संयोग है कि दोनों घटनाएं एक साथ हुईं। जीएसटी परिषद ने हाल ही में 56वीं बैठक में 12 और 28 प्रतिशत की दरों को मिलाकर दो स्लैब – 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत – करने का फैसला किया। इसके अलावा, कोयला, कार्बोनेटेड पेय, और मध्यम व बड़े आकार की कारों पर मुआवजा उपकर समाप्त कर दिया गया।
जीएसटी परिषद की बैठक
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 सितंबर को जीएसटी परिषद की बैठक की अध्यक्षता के बाद इन फैसलों की घोषणा की। नए जीएसटी स्लैब में 5 प्रतिशत की दर आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं, जैसे खाद्य और रसोई सामान, कृषि उपकरण, हस्तशिल्प और चिकित्सा उपकरणों पर लागू होगी। वहीं, 18 प्रतिशत स्लैब में छोटी कारों, मोटरसाइकिलों (350cc तक), और इलेक्ट्रॉनिक व घरेलू सामानों जैसी वस्तुएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, तंबाकू और पान मसाला जैसे विलासिता और हानिकारक उत्पादों पर 40 प्रतिशत स्लैब लागू होगा।






