भारत–EU FTA पर सहमति के बाद पीएम मोदी की ‘‘MODIPLOMACY’ चर्चा में, सोशल मीडिया पर कहा गया ‘माइक्रो-टारगेटेड स्टेटक्राफ्ट’

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नई कूटनीतिक पहल की है। उन्होंने EU के 27 सदस्य देशों को उनकी अपनी भाषाओं में सोशल मीडिया पर संबोधित किया, जिसे विशेषज्ञ 'माइक्रो-टारगेटेड स्टेटक्राफ्ट' बता रहे हैं।
भारत–EU FTA पर सहमति के बाद पीएम मोदी की ‘‘MODIPLOMACY’ चर्चा में, सोशल मीडिया पर कहा गया ‘माइक्रो-टारगेटेड स्टेटक्राफ्ट’

नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति बनने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अनूठी कूटनीतिक पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। समझौते के बाद पीएम मोदी ने परंपरागत तरीकों से हटकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों को उनकी अपनी राष्ट्रीय भाषाओं में संबोधित किया।

यह पहली बार है जब किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते के बाद इस तरह का व्यक्तिगत और भाषाई रूप से विविधतापूर्ण संवाद किया गया है। पीएम मोदी के इस कदम को कूटनीतिक हलकों में ‘पब्लिक डिप्लोमेसी’ का एक नया अध्याय माना जा रहा है, जिसका मकसद सरकारों के साथ-साथ सीधे जनता से जुड़ना है।

सोशल मीडिया पर ‘ModiDiplomacy’ की गूंज

प्रधानमंत्री के इन ट्वीट्स के बाद सोशल मीडिया पर इसे ‘ModiDiplomacy’ का नाम दिया गया। X पर कई यूजर्स ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे ‘सिंबॉलिक इंटेलिजेंस’ और ‘माइक्रो-टारगेटेड स्टेटक्राफ्ट’ का बेहतरीन उदाहरण बताया। एक यूजर ने लिखा कि पीएम मोदी ने यूरोप को सिर्फ एक राजनीतिक गुट के तौर पर नहीं देखा, बल्कि हर देश की अलग पहचान और भाषा का सम्मान किया है।

सोशल मीडिया पर हुई चर्चाओं के अनुसार, यह कदम दर्शाता है कि भारत की विदेश नीति अब केवल सरकारों के बीच संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। इसे यूरोप के नागरिकों के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

परंपरागत कूटनीति से एक कदम आगे

राजनयिक मामलों के जानकार मानते हैं कि यह पहल भारत की विदेश नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। आमतौर पर ऐसे व्यापारिक समझौतों के बाद केवल आधिकारिक बयान या साझा प्रेस विज्ञप्ति जारी की जाती है। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत स्तर पर लगभग 27 यूरोपीय भाषाओं में संदेश साझा कर एक नई मिसाल कायम की है।

यह कदम आर्थिक साझेदारी को जन-कूटनीति (Public Diplomacy) के साथ जोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार करना है।

डिजिटल स्टेटक्राफ्ट का नया मॉडल

पीएम मोदी की यह पहल भारत की बढ़ती डिजिटल कूटनीति की ताकत को भी प्रदर्शित करती है। आज के दौर में जब सोशल मीडिया संवाद का एक शक्तिशाली माध्यम बन चुका है, तब भारत इसका उपयोग वैश्विक मंच पर अपनी बात सीधे जनता तक पहुंचाने के लिए कर रहा है।

भारत-EU FTA के बाद सामने आया यह संवाद मॉडल भविष्य में भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए एक टेम्पलेट बन सकता है, जहां आर्थिक समझौतों के साथ-साथ सांस्कृतिक और भाषाई सम्मान को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

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