नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक शिखर सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियों, विशेषकर ऊर्जा संकट पर भारत के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया एक कठिन दौर से गुजर रही है, तब भारत तेजी से और निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत अपने नागरिकों और किसानों को इसके प्रभाव से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक भीषण युद्ध ने दुनिया को गंभीर ऊर्जा संकट में धकेल दिया है। उन्होंने कहा, “इस संकट से कोई भी देश अछूता नहीं है। हम भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।”

‘कोविड की तरह इस संकट से भी पार पा लेंगे’

प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ भारतीयों पर अपना विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि जैसे देश ने एकजुट होकर कोविड महामारी का सामना किया था, उसी तरह इस संकट से भी पार पा लिया जाएगा।

“मुझे 140 करोड़ भारतीयों पर पूरा भरोसा है कि कोविड काल की तरह हम इस संकट से भी पार पा लेंगे। हमारा संकल्प स्पष्ट है – दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्धों के कारण नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए।”- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

उन्होंने बताया कि भारत इस चुनौती से निपटने के लिए कई मोर्चों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “मैंने कई विश्व नेताओं से बात की है; हम ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।”

जमाखोरी रोकने के लिए राज्यों को दिए निर्देश

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने संकट के समय में अवसर तलाशने वालों को भी चेतावनी दी। उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि वे ऐसे समय में कालाबाजारियों और जमाखोरों को रोकने के लिए अपनी निगरानी बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि इस संकट से निपटने में समाज के हर वर्ग, चाहे वह पार्टियां हों, मीडिया हो, युवा हों या फिर शहर और गांव, सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

‘दुनिया के लिए गुरुत्वाकर्षण का केंद्र बन रहा भारत’

पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत की वैश्विक जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्होंने कहा, “कई वैश्विक नेता कह रहे हैं कि भारत पूरी दुनिया के लिए गुरुत्वाकर्षण का केंद्र बन रहा है। कई वैश्विक संकटों के बावजूद, विश्व नेता और विशेषज्ञ बड़ी उम्मीदों के साथ भारत की ओर देख रहे हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर कोई भविष्य का हिस्सा बनना चाहता है, तो उसे भारत से जुड़ना होगा।