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‘पुरानी इमारतें गुलामी की प्रतीक थीं, इनका मकसद भारत को जंजीरों में जकड़े रखना था’, सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के उद्घाटन पर बोले PM मोदी

Written by:Ankita Chourdia
Published:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को दिल्ली में नए प्रधानमंत्री कार्यालय 'सेवा तीर्थ' और 'कर्तव्य भवन' का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक जैसी पुरानी इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य की प्रतीक थीं, जिन्हें अब बदला जा रहा है।
‘पुरानी इमारतें गुलामी की प्रतीक थीं, इनका मकसद भारत को जंजीरों में जकड़े रखना था’, सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के उद्घाटन पर बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) परिसर का उद्घाटन किया, जिसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने ‘कर्तव्य भवन-1’ और ‘कर्तव्य भवन-2’ का भी शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद दशकों तक देश पर शासन करने वाली मानसिकता और उसके प्रतीक अब बदले जा रहे हैं।

पीएम मोदी ने नॉर्थ और साउथ ब्लॉक जैसी इमारतों को ‘गुलामी का प्रतीक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इन इमारतों का निर्माण ब्रिटिश साम्राज्य की ताकत दिखाने और भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखने के मकसद से किया गया था। अब भारत उस दौर से आगे बढ़कर ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।

‘गुलामी की मानसिकता से मुक्ति’

प्रधानमंत्री ने इस अवसर को भारत की विकास यात्रा में एक नई शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि यह महज इमारतों का बदलाव नहीं, बल्कि एक नई कार्य संस्कृति और सोच का प्रतीक है।

“आजादी के बाद साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक निर्णय लिए गए और नीतियां बनीं। लेकिन यह भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थी। इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पीएम मोदी ने याद दिलाया कि कैसे उनकी सरकार ने राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’, मुगल गार्डन का नाम ‘अमृत उद्यान’ और पुराने संसद भवन को ‘संविधान सदन’ का नाम देकर औपनिवेशिक प्रतीकों को बदला है।

नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में बनेगा म्यूजियम

प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पुरानी इमारतों का ऐतिहासिक महत्व बना रहेगा। उन्होंने घोषणा की कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, जहां से कई दशकों तक देश की नीतियां बनती रहीं, उन्हें एक भव्य म्यूजियम में बदला जाएगा। उन्होंने कहा, ‘वह परिसर, वह इमारत भारत के इतिहास का अमर हिस्सा है इसलिए हमने उस भवन को देश के लिए समर्पित म्यूजियम बनाने का फैसला किया है।’

क्या है सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन?

‘सेवा तीर्थ’ का पहले नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ था, जिसे अब बदला गया है। यह दारा शिकोह रोड पर स्थित है और इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय होंगे। वहीं, कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय समेत कई प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को स्थानांतरित किया जाएगा। यह कदम सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना और सरकारी कामकाज को आधुनिक बनाना है।

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