विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर मानव तस्करी और धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे गुरुग्राम के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बलवंत उर्फ बॉबी कटारिया को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने शुक्रवार को कटारिया की नियमित जमानत याचिका स्वीकार कर ली। यह फैसला पंचकूला की विशेष NIA अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद आया है।
कटारिया पिछले लगभग 20 महीनों से न्यायिक हिरासत में था। हाईकोर्ट ने जमानत के लिए एक अहम शर्त रखी है — कटारिया को दो दिनों के भीतर 19.67 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पंचकूला की विशेष एनआईए अदालत में जमा कराना होगा। इसके बाद ही उसे रिहा किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला युवाओं को विदेश में अच्छी नौकरी का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये ठगने और उन्हें अवैध रूप से दूसरे देशों में भेजने से जुड़ा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अनुसार, बॉबी कटारिया और उसके सहयोगियों ने एक संगठित गिरोह बनाकर कई लोगों को अपना शिकार बनाया।
आरोप है कि पीड़ितों को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सिंगापुर जैसे देशों में आकर्षक रोजगार का वादा किया गया था। इसके एवज में उनसे कुल 19.67 लाख रुपये वसूले गए। हालांकि, नौकरी दिलाने के बजाय उन्हें लाओस जैसे अन्य देशों में भेज दिया गया, जहां उनके साथ धोखाधड़ी हुई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा पुलिस से जांच NIA को सौंपी गई थी।
बचाव पक्ष ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं?
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कटारिया के वकील ने कई तर्क पेश किए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि जिन लोगों ने शिकायत की है, उन्होंने स्वेच्छा से विदेश जाने के लिए संपर्क किया था और सेवाओं के लिए भुगतान किया था।
बचाव पक्ष ने कहा, “ये लोग विदेश गए और कुछ समय तक वहां रहे भी, लेकिन जब वे वहां की कार्य परिस्थितियों से असंतुष्ट हो गए, तो अपनी मर्जी से वापस लौट आए।”
वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि कटारिया लगभग 20 महीने से जेल में है और उसके खिलाफ कोई अन्य मामला लंबित नहीं है। साथ ही, कथित धोखाधड़ी की पूरी राशि यानी 19.67 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट विशेष अदालत में जमा करने का आश्वासन भी दिया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
जमानत के साथ लगाई गईं ये शर्तें
हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए कटारिया पर कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं।
- उसे दो दिन के भीतर 19.67 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा।
- वह मामले के किसी भी गवाह से संपर्क नहीं करेगा या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।
- उसे जांच और ट्रायल में पूरा सहयोग करना होगा।
फिलहाल, यह मामला पंचकूला की एनआईए विशेष अदालत में विचाराधीन है। अभियोजन पक्ष के कुल 73 गवाहों में से अब तक 23 के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।





