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हाई कोर्ट का सड़क सुरक्षा पर बड़ा फैसला, हाईवे से मंदिर-मजार समेत 2000 से अधिक अतिक्रमण हटाने का आदेश, 2 महीने का दिया समय

Written by:Gaurav Sharma
Published:
राजस्थान हाई कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद-21) से जोड़ते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे बने मंदिर, मजार, घर और दुकानों समेत कुल 2216 चिह्नित अवैध निर्माणों को दो महीने के भीतर हटाने का सख्त निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट का सड़क सुरक्षा पर बड़ा फैसला, हाईवे से मंदिर-मजार समेत 2000 से अधिक अतिक्रमण हटाने का आदेश, 2 महीने का दिया समय

जयपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक बेहद सख्त रुख अपनाते हुए राज्य भर के राष्ट्रीय और राजकीय राजमार्गों से सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि हाईवे के ‘राइट ऑफ वे’ क्षेत्र में मौजूद कोई भी संरचना, चाहे वह धार्मिक हो, आवासीय हो या व्यावसायिक, कानूनन अवैध है और इसे नियमित नहीं किया जा सकता। इस फैसले के तहत कुल 2216 अतिक्रमणों को अगले दो महीने में हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

यह अहम आदेश जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने हिम्मत सिंह गहलोत द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका का आधार एक धर्मकांटे के पास हुआ भीषण सड़क हादसा था, जिसमें चार लोगों की जान चली गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश जोशी, ऋषि सोनी और कामिनी जोशी ने पैरवी की।

क्यों दिया गया यह सख्त आदेश?

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सड़क की सेंटर लाइन से दोनों ओर 40-40 मीटर तक भवन रेखा और 75-75 मीटर तक नियंत्रण रेखा होती है। इस सीमा का उल्लंघन सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा को खतरे में डालता है और ऐसे अतिक्रमण सड़क हादसों को न्योता देते हैं। कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत नागरिकों को मिले जीवन के अधिकार का एक अभिन्न अंग है।

सुनवाई के दौरान पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे (ROW) में 103 धार्मिक स्थल, 881 आवासीय भवन और 1,232 व्यावसायिक निर्माण अवैध रूप से बने हुए हैं।

अतिक्रमण हटाने के लिए बनेगी डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स

हाई कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

आदेश के मुताबिक, सात दिनों के भीतर हर जिले में एक ‘डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स’ का गठन किया जाएगा। इस टास्क फोर्स में जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, NHAI, PWD और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे। यह टीम संयुक्त रूप से अतिक्रमणों की पहचान कर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हटाने की पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार होनी चाहिए, जिसमें अतिक्रमणकारियों को पूर्व सूचना देना, सुनवाई का मौका देना और पूरी कार्रवाई की जीआईएस मैपिंग व वीडियोग्राफी कराना शामिल है।

धार्मिक स्थलों पर भी होगी कार्रवाई, नेताओं ने दी प्रतिक्रिया

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मार्गों पर बने धार्मिक अतिक्रमणों को भी हटाया जा सकता है और उन्हें कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी। इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

“हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करना हमारा कर्म है। नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हमारे लिए सभी धर्म सर्वमान्य हैं, पर सड़कों में अगर कोई दुविधा है तो नियम अनुसार न्यायालय के आदेश की पालना सरकार करेगी।”- जोगाराम पटेल, कानून मंत्री

वहीं, कांग्रेस के चीफ व्हिप रफीक खान ने कहा कि प्रशासन को मेरिट और डिमैरिट के आधार पर निर्णय लेना चाहिए और जनता की आवाज को ध्यान में रखा जाना चाहिए। भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि कोर्ट के आदेश का सम्मान है, लेकिन यह देखना होगा कि कौन से स्थान प्राचीन हैं और कौन से बाद में बने हैं। उन्होंने कहा, “अगर धर्म की आड़ में कोई अतिक्रमण है तो उसे हटाने में सभी को सहयोग करना चाहिए।”

राज्य सरकार को दो महीने में जिला-वार विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 को होगी और हाई कोर्ट स्वयं इस आदेश के पालन की निगरानी करेगा।

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