हवा में बातें करने वाले विमानों को उड़ाने का सपना कई युवा देखते हैं, लेकिन इसे हकीकत में कैसे बदला जाए? देश में तेजी से बढ़ते एयर ट्रैवल के कारण कमर्शियल पायलटों की मांग लगातार बढ़ रही है। यह न सिर्फ एक आकर्षक करियर विकल्प है, बल्कि इसमें जिम्मेदारी और सम्मान भी जुड़ा है। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत, सही मार्गदर्शन और एक बड़े निवेश की जरूरत होती है।
जो छात्र 12वीं के बाद इस फील्ड में अपना करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इसका पूरा प्रोसेस क्या है, योग्यता क्या चाहिए और इसमें कितना खर्च आता है।
शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल फिटनेस
कमर्शियल पायलट बनने की पहली सीढ़ी 12वीं कक्षा है। उम्मीदवार का 12वीं पास होना अनिवार्य है और उसके पास फिजिक्स, मैथ्स और इंग्लिश विषय होने चाहिए। आमतौर पर एयरलाइंस भर्ती के दौरान न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों की शर्त रखती हैं, इसलिए अच्छे अंक लाना जरूरी है।
एक सवाल जो अक्सर पूछा जाता है — क्या बिना साइंस पढ़े पायलट बन सकते हैं? इसका जवाब हां है। अगर किसी छात्र ने 12वीं में साइंस नहीं पढ़ी है, तो वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) से फिजिक्स और मैथ्स की परीक्षा देकर भी इसके लिए योग्य हो सकता है।
शैक्षणिक योग्यता के अलावा, शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पायलट ट्रेनिंग शुरू करने से पहले एक मेडिकल टेस्ट पास करना अनिवार्य होता है, जिसमें आंखों की रोशनी, सुनने की क्षमता और ओवरऑल हेल्थ की गहन जांच की जाती है।
ट्रेनिंग और लाइसेंस का प्रोसेस
कमर्शियल विमान उड़ाने के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) द्वारा जारी किया गया कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) लेना अनिवार्य है। इसी लाइसेंस के आधार पर एयरलाइंस में नौकरी मिलती है। CPL हासिल करने के लिए थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों तरह की ट्रेनिंग पूरी करनी होती है।
ट्रेनिंग के दौरान छात्रों को कई विषयों की गहन जानकारी दी जाती है, जिसमें शामिल हैं:
- एयर नेविगेशन
- मौसम विज्ञान
- विमान उड़ाने के नियम
- विमान के तकनीकी पहलू
- रेडियो कम्युनिकेशन
थ्योरी के साथ-साथ सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है फ्लाइंग ट्रेनिंग। CPL पाने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 200 घंटे की उड़ान पूरी करनी होती है। इस ट्रेनिंग में सोलो फ्लाइट, इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट, नाइट फ्लाइट और मल्टी-इंजन एयरक्राफ्ट पर उड़ान का अनुभव शामिल होता है, जो पायलट को हर परिस्थिति के लिए तैयार करता है।
कितना आता है खर्च और क्या हैं संभावनाएं?
भारत में कमर्शियल पायलट बनने की ट्रेनिंग का खर्च काफी ज्यादा होता है। यह खर्च फ्लाइंग स्कूल और ट्रेनिंग के प्रकार पर निर्भर करता है, लेकिन औसतन इसमें 60 लाख से 70 लाख रुपये तक लग सकते हैं। हालांकि, एविएशन सेक्टर में ग्रोथ को देखते हुए यह एक अच्छा निवेश माना जा सकता है। पायलट बनने के बाद शुरुआती सैलरी काफी आकर्षक होती है और अनुभव के साथ इसमें तेजी से बढ़ोतरी होती है। इस फील्ड में करियर ग्रोथ की संभावनाएं भी काफी उज्ज्वल हैं।





